निदा की अन्तर्वासना-4
इमरान ओवैश कुछ देर बाद निदा अपना एक हाथ उठा कर अपने चूतड़ सहलाने लगी जो कि मेरे लिए इशारा था कि वह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैंने सीधे होकर अपना लण्ड थूक से गीला करके उसके गुलाबी दुपदुपाते हुए छेद पर रखा और थोड़ा ज़ोर लगा कर अन्दर उतार दिया। निदा की एक गहरी सांस छूट गई और उसने नितिन का लंड बाहर निकाल कर अपनी आँखें बंद की और अपने शरीर के निचले हिस्से में लण्ड और जुबान से पैदा आनन्द की लहरों को एकाग्र होकर अनुभव करने लगी। लेकिन इस तरह की गाण्ड मराई में मेरी गोलियाँ नितिन की नाक से टकरा रही थीं लेकिन उसने भी आज किसी ऐतराज़ अवरोध को खातिर में नहीं लाना था। वह अपना काम करता रहा और मैं निदा की गाण्ड मारता रहा। कुछ देर की चुदाई के बाद निदा ने आँखें खोल कर मुझे देखा। वह कुछ …