निदा की अन्तर्वासना-2
इमरान ओवैश मैंने न सिर्फ अपने हाथों को उसकी पीठ पर रखे हुए निदा की ब्रा के हुक खोल दिए बल्कि हाथ नीचे करके उसकी कुर्ती को एकदम से ऐसा ऊपर उठाया के उसकी भरी-भरी चूचियां नितिन की आँखों के आगे एकदम से अनावृत हो गईं और वह दोनों हाथों से उन पर जैसे टूट पड़ा। उत्तेजना के अतिरेक से निदा की आँखें बंद सी हो गईं। मैंने उसके होठों को छोड़ कर उसके गालों, गर्दन और कान को चूमते, चुभलाते और रगड़ते नितिन को संकेत किया और उसने साथ लाये सामान से शहद निकाल लिया। यह शहद उसने निदा की दोनों भूरी-गुलाबी घुंडियों पर मल दिया और फिर एक चूची को उसने अपने मुँह में समेट लिया और ज़ुबान से उसकी घुंडी पर लगा शहद चूसने लगा। एक हाथ से न सिर्फ वह निदा की दूसरी चूची सहला रहा था, बल्कि उसकी घुंडी पर शहद भी मल रहा था। …