कहाँ चली गयी वो

हैल्लो मित्रगणों.. मित्रों ये कहानी आप देशीअडल्टस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं.. ज़्यादातर मुझे बहुत अच्छी लगी है दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आप सभी को मेरी यह कहानी पढ़कर बहुत मज़ा जाएगा.. तो दोस्तों अब मैं आप सबको बोर ना करते हुए अपनी कहानी सुनाता हूँ.. यह एक महीने पहले की बात है। में अपनी आंटी के घर गया था जो मनाली में रहती है और में वहाँ पर घूमने के लिए गया था। मेरे दोस्त बताते थे कि मनाली की लडकियों को सेक्स का बड़ा शोक है वो जल्दी ही किसी से भी चुद लेती है और यह बात सोचकर मेरा लंड भी खड़ा हो जाता था और में सोचा करता था कि शायद मुझे भी वहाँ पर ऐसी ही कोई लड़की मिल जाए जो मेरी प्यास बुझा सके। मैंने अभी तक सेक्स कभी नहीं किया था बस हस्तमैथुन से अपना काम चला लिया करता था।

साथियों मैं मनाली में लगभग हर जगह घूम चुका था.. लेकिन मुझे अब तक कोई ऐसी लड़की नहीं मिली थी और यार मेरे मन में सेक्स के लिए प्यास बढ़ती जा रही थी और मैं वहाँ पर अपनी बाईक लेकर गया हुआ था। एक दिन मेरे मन में एक ख़याल आया क्यों ना आज बस में घुमा जाए और में अपनी बाईक को घर पर छोड़कर बस से घूमने निकल गया। में जिस सिटी बस में घुसा उसमे एक ही सीट खाली थी तो में जल्दी से उस पर जाकर बैठ गया और अब बस कुछ दूर ही गई थी। तो उसमे एकदम से बहुत सारे यात्री चढ़ गये.. क्योंकि हम से आगे जो बस चल रही थी वो खराब हो गयी थी और उस बस के सारे यात्री हमारी बस में आने से बहुत ज़्यादा भीड़ हो गयी।

साथियों मैं थका हुआ सा था तो मैंने अपने से अगली सीट पर अपने हाथ मोड़कर रख लिए और अपने हाथों पर सर टिकाकर आराम करने लगा। तभी मेरा ध्यान मेरे पास में खड़ी लड़की पर गया.. उसका फिगर बड़ा सेक्सी था.. बूब्स बड़े बड़े और उसकी गांड भी बहुत उभरी हुई थी। उसने काले कलर का सूट पहना हुआ था वो बड़ी सेक्सी लग रही थी.. बस में ज्यादा भीड़ होने के कारण सभी लोग आपस में बहुत सटकर खड़े हुए थे। उस लड़की के पीछे एक चाचा खड़े थे और मैंने ध्यान से देखा तो वो चाचा उससे बिल्कुल चिपककर खड़े हो गये और चाचा ने अपना एक हाथ धीरे धीरे उसकी गांड पर रख दिया।

साथियों तो वो देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मुझे बड़ा अफ़सोस हो रहा था और मैं सोच रहा था काश में उस चाचा की जगह होता। इसके बाद वो चाचा धीरे धीरे उसकी मस्त गांड पर अपना हाथ घुमा रहे थे.. लेकिन वो लड़की चुपचाप खड़ी हुई थी जैसे उसे कुछ पता ही नहीं चल रहा हो। इसके बाद उस चाचा ने भीड़ का फायदा उठाते हुए अपना एक हाथ उसके सूट में डाल दिया और मैंने ध्यान से देखा तो वो लड़की इसके मजे ले रखी थी.. लेकिन तभी बस का एक स्टॉप आया और वो चाचा उतर गये और चाचा के चले जाने से वो लड़की थोड़ा सा पीछे होकर जिस सीट पर मैंने अपने हाथ रख रखे थे वो उस पर अपनी गांड टिकाकर खड़ी हो गई और उसकी कोमल गांड मेरे हाथ पर लग रही थी। माँ कसम मेरा तो लंड फटने के लिए तैयार हो गया था यह मेरी लाईफ का पहला मौका था जब मेरा हाथ किसी लड़की की गांड को छू रहा था।

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साथियों मुझे तो पहले ही सेक्स चढ़ा हुआ था और मेरी हिम्मत भी बढ़ी हुई थी कि जब इसने उस चाचा को कुछ भी नहीं कहा तो मुझे क्या कहेगी? तो मैंने भी यह सोचकर उसकी गांड पर हाथ फिराना शुरू कर दिया.. उस लड़की ने मेरी तरफ देखा और मुझे हल्की सी स्माईल दी और मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया था। दोस्तों मुझे इतना ज़्यादा मज़ा आ रहा था कि बता नहीं सकता। में भगवान से दुआ कर रहा था कि यह सफर कभी खत्म ही ना हो और में ऐसे ही उसकी गांड पर अपना हाथ फिराता रहूँ। तब तक बस घंटाघर पहुंच चुकी थी.. लेकिन वहाँ पर जाम लगा हुआ था और में तो यह देखकर बहुत खुश हो गया.. क्योंकि मुझे अब और टाईम मिल गया था। तभी मेरी पास की सीट पर जो चाचा बैठे हुए थे वो उतर गये और वो लड़की मेरे पास में बैठ गई.. उसके मेरे पास बैठते ही में उसको पूरा छुपाकर बैठ गया।

साथियों मैंने उससे बात करने की सोची और उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम टीना बताया। वो मनाली में पढ़ाई करने आई हुई थी और वो बड़ी ही चालू टाईप की लड़की थी और इसके बाद बातों बातों में मैंने उसका मोबाईल नंबर ले लिया और अब मेरे मन में सेक्स की प्यास और बढ़ती जा रही थी।

इसके बाद मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके सूट के पल्लू के नीचे से उसकी चूत के ऊपर फिराने लगा और मैंने महसूस किया कि उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी और उसने मेरा हाथ पकड़कर दबा दिया तो में समझ गया कि अब वो चुद जाएगी.. लेकिन तभी उसका स्टॉप आ गया और वो मुझे स्माईल करते हुए उतर गयी। उस टाईम में बहुत ज़्यादा खुश था। मुझे खुशी के मारे यकीन भी नहीं हो रहा था और उसने मुझे बताया था कि उसकी स्कूटी खराब हो गयी थी तो वो आज पहली बार बस में आई थी और वो जहाँ पर उतरी थी वहाँ पर उसकी ट्यूशन थी और उसकी क्लास शाम को ख़त्म होनी थी। इसके बाद में वहीं से जल्दी जल्दी अपनी आंटी के घर वापस गया और मैंने दो बार मुठ मारी और में नहा धोकर तैयार हो गया था। इसके बाद मैंने उसे कॉल किया तो पता चला कि आज उनके सर नहीं आए थे तो उसकी तभी छुट्टी हो गयी थी और वो तो अपने रूम पर भी आ चुकी थी और उसने इस टाईम में अपनी स्कूटी भी ठीक करवा ली थी।

इसके बाद मैंने उससे कहा कि में तुम से मिलना चाहता हूँ.. तो वो बोली कि मिलकर क्या करने का इरादा है? तो मैंने कहा कि में बताता नहीं हूँ बस करके दिखाता हूँ। तो वो हंसने लगी और उसने अपना पता मुझे दे दिया.. लेकिन उसने कहा कि बाईक मत लाना वर्ना पड़ोसियों को शक हो जाएगा।

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तो मैंने कहा कि ठीक है और में जल्दी से घर से निकल गया.. मैंने सबसे पहले एक कंडोम का पेकेट खरीदा और में उसकी कॉलोनी में ऑटो करके पहुंच गया और उसे कॉल किया। तो वो अपनी स्कूटी लेकर आ गयी और में उसके पीछे बैठ गया और मैंने उससे कहा कि मुझे थोड़ा सा घुमा भी दो। तो वो मुझे एक ऐसे रोड पर ले गयी जो एकदम सुनसान सी थी और इसके बाद मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुये उसके टॉप में हाथ डाल दिया और उसकी नाभि पर हाथ घुमाने लगा और मेरा ऐसा करने से उसे बहुत मजा आ रहा था.. उसकी चमड़ी बहुत ही मुलायम थी। मैंने तभी उसके बूब्स भी दबा दिए और वो उछल पड़ी और बोली कि सब कुछ यहीं पर कर लोगे तो रूम पर क्या करोगे? और वो बोली कि अब रूम पर चलते है। वो बड़ी गरम हो रही थी और उसने मुझे अपनी गली के बाहर उतार दिया और कहा कि यहाँ से तुम पैदल आ जाओ और उसके रूम का दरवाजा रोड पर ही था। तो में धीरे से उसके रूम में घुस गया और घुसते ही मैंने गेट की कुण्डी लगा दी और उसे अपने साथ बेड पर गिरा दिया और उसके होंठो पर अपने होंठ चिपका दिए।

वो मेरी लाईफ की पहली स्मूच थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और इसके बाद मैंने उसके टॉप में हाथ घुसा दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाने लगा और वो अपनी दोनों आखें बंद करके सिसकियाँ ले रही थी। इसके बाद मैंने धीरे धीरे उसका टॉप उतार दिया.. उसने गुलाबी कलर की ब्रा पहनी हुई थी। इसके बाद मैंने झट से उसकी ब्रा भी उतार दी.. उसके बूब्स बड़े ही मस्त थे और मैंने उसके एक बूब्स को मुहं में लेकर चूसना शुरू कर दिया और अपने एक हाथ से उसके दूसरे बूब्स के निप्पल को दबाने लगा।

उसके बूब्स को दबाने और चूसने में मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा था। इसके बाद मैंने उसकी केफ्री उतार दी.. वो आराम से बिना बोले मज़े ले रही थी.. उसके मुहं से बस सिसकियाँ आ अया उह्ह्ह्ह अह्ह्ह की आवाजें आ रही थी। उसने पेंटी भी गुलाबी कलर की ही पहनी हुई थी। मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी उसने अपनी चूत के बाल साफ किए हुए थे और उसकी चूत एकदम चिकनी लग रही थी और इसके बाद मैंने उसकी चूत पर अपनी एक उंगली रख दी। तभी उसने एक ऐसा झटका मारा कि मेरी उंगली उसकी चूत में घुस गयी.. उसकी चूत अंदर से बड़ी मुलायम थी और अब मैंने अपने भी सारे कपड़े उतार दिए।

इसके बाद में उसके ऊपर लेट गया और में थोड़ा सा ऊपर उठा तो उसने मेरा लंड पकड़ लिया और वो मेरे लंड को अपनी चूत पर रगड़ने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था और इसके बाद मैंने टाईम खराब ना करते हुए अपने लंड पर कंडोम लगा लिया और अपना लंड धीरे धीरे उसकी चूत में घुसा दिया। वो आह्ह्ह आह्ह्ह करने लगी और बोली कि चोद दो मुझे मेरी चूत फाड़ दो और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारो। तभी उसके मुहं से यह सब सुनकर मुझे बड़ा जोश आ गया और अब मैंने अपने दोनों हाथ उसकी गांड पर रखे और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। तो वो भी अपनी गांड उठा उठाकर पूरा लंड चूत में ले रही थी और हम दोनों बड़े मजे से चुदाई कर रहे थे।

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इसके बाद उसे चोदते हुए मुझे टाईम का भी पता नहीं चला और कुछ देर बाद ही वो चुपचाप लेटी रही जैसे उसे नींद आ गयी हो और जब मैंने पूछा तो उसने बताया कि वो झड़ गयी है और उसके झड़ने के एक मिनट के बाद ही में भी झड़ गया और झड़ने के बाद उसके ऊपर ही लेट गया।

इसके बाद हम दोनों को ऐसे ही लेटे लेटे नींद आ गई और हम दोनों बहुत देर तक ऐसी ही हालत में सोते रहे। इसके बाद मैंने उठकर अपना लंड साफ किया और इसके बाद उसने मेरा लंड पकड़ लिया और अपने मुहं में ले लिया और मज़े से चूसने लगी। तो मेरा लंड इसके बाद से खड़ा हो गया.. लेकिन वो उसे चूसती रही मुझे बहुत ज़्यादा गुदगुदी हो रही थी और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने उसके सर के बालों को पकड़ा और उसके मुहं में ही ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और मैंने देखा कि उसकी सांसे धीरे धीरे तेज होने लगी थी। उसके चहरे का रंग लाल होने लगा था और इसके बाद भी में उसके मुहं में लंड को धकेले जा रहा था और करीब दस मिनट के बाद में उसके मुहं में ही झड़ गया।

तभी उसके मोबाईल पर कॉल आया उसकी एक दोस्त उसके रूम पर आने वाली थी और वो रास्ते में थी। तो उसने मुझे कहा कि अब आपको जाना होगा और हम इसके बाद कभी मिलते है और उसने मुझे बताया कि उसका एक बॉयफ्रेंड है.. लेकिन वो जहाँ से आई थी वो वहीं पर है और वो उसके साथ बहुत बार चुदाई कर चुकी थी। उसका भी मेरी तरह सेक्स के लिए बड़ा मन कर रहा था और जब उस चाचा ने उसकी गांड छुई तो उससे कंट्रोल नहीं हुआ और वो मुझसे चुदवाने के लिए तैयार हो गयी थी।

बस इसके बाद में वहाँ से अपने घर पर आ गया। इसके बाद मुझे घर आकर पता चला कि मेरे दादा जी भी मनाली आए हुए थे वो मुझे अपने साथ वापस सहारनपुर ले आए और उस दिन के बाद से उसका मोबाईल नंबर बंद आ रहा था। इसके बाद में बीच में एक बार मनाली जाकर उसकी कॉलोनी में गया और उसके बारे में पता किया तो मुझे पता चला कि वो वहाँ से कमरा छोड़कर चली गई थी। अब जब भी में उसे याद करता हूँ तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है। उसके गद्देदार चूतर अलग से फुले दिखाई देते है.

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