मम्मीने बेटा समझ के मूसल रफीक भाई से चुदाई की

मेरा नाम श्वेता पंडित है, मेरी उम्र ४५, मैं मेरी सासु मां के साथ रहती हु, मेरी बेटी जो बाहर होस्टल में ही पढ़ती है, ओर रही पति की बात तो उनका देहांत हो चुका था।

मेरे बारे में थोड़ा बताती हु मेरी ऊंची ५.६, मेरा फिगर ४०-३४-५० का है और मेरे बदन का रंग गेहुँआ है, मतलब न ज्यादा गोरी हूँ न ज्यादा सांवली हूँ।

दोस्तो, आज जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रही हूं, यह कहानी रफीक भाई ने कैसी मेरी चुदाई की कहानी है। पहली याने मेरे पति के गुजर जाने के बाद मेरे जीवन में कभी सेक्स हुआ ही नहीं था।

सालो बाद रफीक भाई ने मुझे चोद कर मेरे कुवारे यौवन को फिर से मेरी चूत सील तोड़ने का एक अनुभव deke फिर से हराभरा कर दिया।

जैसे के मैने आप को कहा मैं सासुमा के साथ रहती हु और मेरी बेटी होस्टल में पढ़ती है। मै एकदम संस्कारी औरत हु।

उस समय मेरे शरीर में काफी बदलाव आए और जैसे जैसे मैं मेरी उम्र चालस होती गई मेरे बदन में सेक्स की गर्मी बढ़ती ही गई। हाजी यह बात तो है लड़कियों में के बीस के कमसिन उमर में अन्तर्वासना बढ़ती जाती है और जब उम्र चालीस के पार होती है तब भी कामुकता बढ़ती है।

कई बार तो मैं रात में मैं अकेली ही सोती और रात मैं अपनी चूत को सहलाती रहती थी।

कभी कभी तो रात में सोते हुए ही मुझे गंदे सपने आते और मेरी निकर गीली हो जाती थी।

जल्द ही मेरे पास स्मार्टफोन आ गया और उसमें रात में मैं गंदी गंदी फिल्में देखना शुरू कर दी।

जिससे मेरे अंदर सेक्स के प्रति और उतेजना आ गई।

मेरा बदन इस हद तक गदराया हुआ हो गया कि मैं किसी उत्तेजित औरत की तरह दिखती थी।

४० साइज के मेरे बड़े बड़े दूध सभी की नजर खींचते थे।

जैसे के मैने आप को कहा मेरी फिगर ४०-३४-५०

याने मेरे स्तन ४० के, कमर ३४ की और गांड ५० की भरी हुई है, मैं ३८B size ka bra पहनती हु. मेरे स्तन तो एकदम ओसी दास मॉडल जैसे है।

मैं हमेशा सलवार सूट ही पहनती थी और मेरा बदन इस तरह से भरा हुआ था कि जैसे मेरे कपड़े फाड़ कर दूध बाहर निकल आएगा।

मेरा पूरा बदन गठीला और कसा हुआ था और मेरे कपड़े मेरे बदन पर बिल्कुल ही कसे हुए रहते थे। मेरा पंजाबी ड्रेस तो ऐसा था के मैं आईने के साम ने खड़ी होती तो मेरे ऊपर के स्तन जादा उभरके दिखते थे।

बाजार दुकान से कोई सामान लाना होता तो मैं ही जाती थी, जब मैं अपने मोहल्ले के चौराहे पर पहुँचती तो वहां पर मोहल्ले के कई लोग मौजूद रहते थे।

वही पर एक पान की दुकान पर हमेशा 3 अंकल बैठे रहते।

जब भी मैं वहाँ से गुजरती उनकी निगाहें मुझपर ही टिकी हुई रहती। 

मैं सब कुछ समझती थी, लेकीन मे हो देखा अंदेखा कर्ती थी, वो अंकल लोग मुझे बेहद ही गंदी निगाह से घूरा करते थे, असल मे मुझे भी उंका मेरी ओर देखना अच्छा लगता था लेकीन एक औरत होने के नाते मैं वो जता नही पति थी।

कई बार तो ऐसा भी हुआ था कि कभी शाम में जब मैं वहाँ जाती तो उनमें से एक अंकल मेरे आगे पीछे होते हुए मेरे घर तक मेरे साथ आते।

ऐसा कै बार हुआ था, पहले तो मुझे ये बेहद बेकार लगता था लेकिन पता नहीं क्यों मैं उनमें से एक अंकल की तरफ आकर्षित होने लगी। अब आप लोग इसे मेरे बदन की गर्मी कहिए या मेरे अंदर चुदाई की उत्सुकता।

मैं उनको भी मेरी तिर्की नजर से देख ने लगी देखने लगी और जब वो मुझे देखकर मुस्कुरा देते लेकिन मैं देखा अनदेखा करती। फिर वो धीरे धीरे कुछ कहके मेरे पीछे पीछे आते और फिर से चले जाते।

वो अंकल मेरे पापा के उम्र के थे और करीब ६० साल के थे। देखने में काफी हट्टे कट्टे और लंबे चौड़े कद के थे, लंबी दाढ़ी भी थी उनकी।

जब से ये सिलसिला शुरू हुआ तो मेरी एक आदत हो गई थी कि मैं रात में गंदी फ़िल्म देखती और उन अंकल को याद करते हुए अपनी चूत में उंगली करती और सोचती कि वही मुझे चोद रहे हैं।

एक दिन ऐसा हुआ, मैं शॉपिंग करने के लिए निकली तभी अचानक बाहर देखा तो वो अंकल मेरी सासुमा के साथ नजर आए, उन्हे देख कर मैं थोड़ी रुक गई। तभी देखा तो वो उन्हे घर ही ला रही थी। मैं तो उलटे पाव फिर से अंदर घर चली गई और किचन में गई।

सासुमा उनको अंदर लेके आई और बैठने कहा, कुछ बाते करने लगी, पोती और मेरे बारे में, कहा आप रुको जरा मैं चाय बनाके लाती हु। तभी वो अंदर आई और मुझे देखा।

सासुमा में कहा “अरे श्वेता, तू यहां, मुझे लगा तुम बाजार जा रही हो” मैने कहा “हा माजी मैं जाहि रही थी तभी आप आई किसी मेहमान को लेके” सासु मां बोली “अच्छा चलो जरा चाय लेके आना”

में चाय लेके बाहर गई, मैने सासुमा के हाथ में एक कप और अंकल के हात में एक कप दिया, तभी मेरी ओर अंकल की नजर एक दूसरे पे पड़ी। सासुमा ने कहा “अरे बहु तुम भी चाय पियो हमारे साथ, जाओ अपना कप लेके आओ”। मैने अपना कप लिया, बाहर आई, सासुमा बोली “अरे पगली ये तो रफीक भाई है, हमारे पुराने मित्र, देखो कैसे तंदुरुस्त लागते है ६० साल की उम्र है इंनकी, लागते है क्या, देखो रफीक भाई मेरी बहु कितनी संस्कारी है”। रफीक जी तुरंत ही हस के बोले “क्या, माजी, आप भी बड़ा मजाक करते हो”। सासुमा ने कहा “मजाक क्या सच में रफीक भाई, अच्छा इसे मिलो ये मेरी बहु श्वेता”। हम दोनो ने एक दूसरे को देखा और हल्का सा स्माइल किया, तो सासुमा ने इशारा किया, मैने तुरंत अपना दुप्पटा सिर से लेके ही उनके पैर छूवे।

मै जभी बाजार जाति तो वो रफिक भाई मेरी ओर देखते, लेकिन मैं अभी भी देखा अनदेखा करती। एक दिन तो मैंने सुना उनके एक फ्रेंड को कहते हुवे “यार रफीक, इसकी उम्र क्या होगी? बड़ी इश्कियाना दिख ते है येतो, भाई ऐसे कोई मिल जाए एक दिन के लिए तो मैं जन्नत की सफर कर लू”

तभी रफीक भाई बोले “अबे चुप कर कुछ भी बकवास मत कर”। मै आगे चल ही रही थी, एक दुकान में गई, पीछे देखा तो रफीक भाई खड़े थे अब शाम के ७.३० बजे थे उनके साथ कोई नही था। 

वो मेरे पास आए, स्माइल दिया और कहा” कैसी हो श्वेता”

मैने कहा “ठीक हु रफीक भाई” रफीक भाई ने कहा “अरे श्वेता, वो एक बात थी” मैने कहा “हा, रफीक जी कहो”

रफीक भाई ने कहा “अरे कैसे बताऊं, शर्म आती है” मैने कहा “रफीक भाई, कहो क्या बात है, मैं सुन लूंगी”

रफीक भाई ने कहा “आप रही थी तब मेरे एक दोस्त ने कमेंट किया” मैने कहा “हा रफीक भाई, मैने सुना वो कमेंट”

रफीक भाई ने कहा “प्लीज उसका बुरा मत मानो, मैं उसके तरफ से माफी मांगता हु” मैने कहा “रफीक भाई, किस बात का बुरा, मैं तो एक विधवा अकेली हु, मेरी जैसे को ये कमेंट सुनेही पड़ते है, आप कोई टेंशन ना ले” रफीक भाई ने कहा “श्वता जी, शुक्रिया, आगेसे ऐसा नहीं होगा, इसका मैं खयाल रखूंगा” मैने कहा “रफीक भाई कोई बात नही”

कुछ दिन ऐसे ही गए, मेरा शॉपिंग को जाना और रफीक भी का मेरी ओर देख ना और स्माइल करना, थोड़े ही दिन में उनके फ्रेंड्स के साथ भी उन्होंने मुझे मिलवाया, अब वो भी मेरी तरफ देख के hi hello करने लगे।

धीरे धीरे ऐसा ही सब कुछ चलता रहा और मेरे मुस्कुराने से उनको भी लग गया था कि मेरे अंदर भी उनके प्रति कुछ है।

बीच बीच में रफीक भाई का मेरे घर आना जाना भी होता था लेकिन सब नॉर्मल था।

फिर एक दिन उन्होंने हिम्मत दिखाई। शाम का समय था और मैं कुछ सामान लेने दुकान गई हुई थी। अंधेरा छा गया था और हल्की बारिश हो रही थी।

मैं जल्दी जल्दी घर की तरफ आ रही थी। तभी रास्ते में सुनसान देख उन रफीक भाई अंकल ने मुझे रोक लिया। उन्होंने मुझे एक कागज का टुकड़ा दिया और चले गए।

मैंने उस कागज को अपनी ब्रा में दबाया और घर आ गई।

सामान रसोई में रखकर मैं बाथरूम चली गई और वहाँ मैंने ब्रा से वो कागज निकाला।

उस पर एक फोन नम्बर लिखा हुआ था और लिखा था कि इस नम्बर में रात को मैसेज करना।

खाना खाने के बाद, सासुमा उनके कमरे में सोती थी, और मैंने अपने कमरे का दरवाजा बंद करके उस नम्बर पर एक मैसेज किया।

वहाँ से तुरंत ही जवाब आया जैसे वो मेरे मैसेज का ही इंतजार कर रहे थे।

फिर हम दोनों के बीच रोज रात में चैट होने लगी और कभी कभी बात भी होने लगी।

कुछ दिन बाद ही उन्होंने रफीक भाई मुझे कहा “मैं तुम्हें पसंद करता हूँ” ! मैं भी उनके प्यार में पिघल गई और उनको हाँ कह दी। मैने भी मेसेज में कहा “humm”

एक दिन चाट करते वक्त रफीक भाई ने कहा “श्वेता एक बात पूछूं” 

मैने कहा “पूछो रफीक भाई”

रफीक भाई “श्वेता तुम कभी साड़ी नही पहनती?”

मैने कहा “रफीक भाई, हा पहनती हु, जब कभी बाहर जाना हो तो”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता तो, प्लीज एक दिन साड़ी पहनकर बाजार में आओ”

मैने कहा “ठीक है रफीक भाई, आप की इतनी इच्छा है तो मैं कल ही आती हु साड़ी पहनकर, वैसे भी आप के काफी बार यह सवाल किया है”

दूसरे दिन मैने सासुमा को कहा “सासु जी, आज मेरी स्कूल की पुरानी दोस्त मिलने वाली है, हम कॉफी पीने जानेवाले है, तो क्या पहनु”

सासुमा ने तुरत ही कहा “बेटी इतनी साडिया है तेरे पास लेकिन तू जादा पहनती नही, आज तो तू साड़ी ही पहन के जा”

फिर उस दिन मैं साड़ी पहनकर निकली, चुराहे पे रफीक जी ने मुझे देखा, वो खुशी के मारे पागल ही दिख रहे थे।

लेकिन मैने घूंघट ओढ़ा था, मैं दिख सकती थी के रफीक जी की कामुक नजर, उस वक्त उनके फ्रेंड्स का ध्यान मेरी तरफ नही था वो अपनी ही मस्ती मजाक में थे। लेकिन मेरी ओर रफीक भाई की आंख में चोली हो गई थी।

उस दिन रात को फिर से मेसेज आया रफीक भाई से।

रफीक भाई “श्वेता, एक बात बताऊं”

मैने कहा “हाजी, रफीक भाई बताओ”

रफीक भाई “श्वेता तुम बड़ी ही खूबसूरत दिख रही थी साड़ी में, घूंघट लिए हुवे एकदम नई नवेली दुल्हन जैसे”

मैने कहा “रफीक भाई, मुझे मालूम नही था, आप इतने शौकीन किस्म के आदमी हो”

रफीक भाई “श्वेता जी आप भी ना”

मैने कहा “अच्छा जी, और कुछ पूछ ना है”

रफीक भाई ने कहा “ओर कुछ humm सोच के पूछ ता हू” 

मैने कहा “ohh, रफीक भाई इसमें भी सोचना है आप को”

रफीक भाई ने कहा “एक पूछूं क्या, थोड़ा प्राइवेट सवाल है”

मैने कहा “Ohh प्राइवेट सवाल, मैं भी तो देखूं क्या प्राइवेट सवाल है”

रफीक भाई ने कहा “बुरा मत मानो लेकिन आप की साइज क्या है” मैने भी कहा “रफीक भाई, ohh साइज लेकिन किसकी वो भी तो बताओ”

रफीक भाई ने कहा “शर्म आती है, ब्रा की साइज”

मैने कहा “रफीक भाई सवाल तो बड़ा गंदा है आप का तो शरम कैसी” 

रफिक भाई “श्वेता, शायद मै कुछ जादा ही पुच रहा हुं, खैर जा ने दो” 

मैने काह “hahahaha, रफिक जी, मेरी ब्रा साइज् है ३८B याने” रफिक जी ने काह “श्वेता, याने” मैने कहा “याने मेरे स्तन ४० के है” रफीक भाई ने कहा “ohhh, ओर”

मैने कहा “चलो अब मैं पूरा ही बताती हु, स्तन ४० के, कमर ३४ की और मेरा पिछवाड़ा ५० की भरी हुई है, मैं ३८B साइज का ब्रा पहनती हु”

रफीक जी ने कहा “ohh, मस्त”

मैने भी कहा “रफीक भाई एक सवाल है”

रफीक भाई ने कहा “पूछो” 

मैने कहा “रफीक भाई, आप की हाइट क्या है”

रफीक भाई ने कहा “मेरी हाइट ६.१ है”

मैने कहा “ohh, अच्छा”

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रफीक भाई ने कहा “क्यों”

मैने कहा “रफीक भाई अगर मुझे इतने सवाल पूछ ते हो तो क्या मैं आप को एक सवाल नही पूछ सकती”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता, माफ़ करना, आप मुझे कोई भी सवाल पूछ सकते हो, तो चलो अभी अब आप की हाइट बता दो”

मैने कहा “मेरी तो ५.३ है”

रफीक भाई ने कहा “ओह, अच्छा”

मैने कहा रफीक भाई “आप की पर्सनैलिटी बहुत अच्छी है, मुझे तो आप की लंबी दाढ़ी बहुत पसंद है, सच में इस साठ साल की उमर में भी आप जोशीले दिख ते हो”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता, आप भी तो ४५ की उमर में इतनी हसीन दिखती हो”

करीब दो महीने तक हम दोनों ऐसे ही फोन पर चैट करते रहे, एक दो बार उन्होंने मुझसे फोटो भी मांगी लेकिन मैने मना कर दिया, और उन्होंने एक दिन मुझसे मिलने के लिए कहा। मैंने भी इसके लिए हाँ कह दी।

लेकिन हम लोगों को कोई सही जगह नहीं मिल रही थी जहाँ पर हम लोग मिल सकते।

फिर जैसे ऊपर वाले ने हम दोनों की सुन ली।

एक दिन ऐसा हुआ के मेरी सासु मां को किसी प्रोग्राम का न्योता आया, तो उन्होंने मुझे कहा “बहु, मैं एक जगह पे सत्संग के लिए जाने वाली हु, मैं शुक्रवार को जाऊंगी और शनिवार को वापस आऊंगी, तो क्या तुम अकेली रह सकती हो?” 

मैने कहा “सासुमा, आप चिंता ना करे, आप जाओ सत्संग”

सासुमा ने कहा “बहु, वैसे भी मैने रफीक भाई को बताया है के तुम अकेली हो तो कुछ लगा तो खयाल रख ना”

मैने कहा “सासुमा आप भी, अरे ये सब रफीक भाई को बोलने की क्या जरूरत है, मैं छोटी नही हू, रह लूंगी मैं अकेली”

शुक्रवार आया, सासुमा सत्संग के लिए चली गई।

रफीक भाई का मेसेज आया ” श्वेता, कैसी हो तुम”

मैने कहा “ठीक हु, रफीक भाई”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता, चलो आज तुम मुझे खीर खिलाओ” मैने कहा “क्यों नही रफीक भाई, लेकिन शाम को” रफीक भाई ने कहा “ठीक है, श्वेता” मैने कहा “रफीक भाई लेकिन आप के दोस्त, वो तो आप का इंतजार करेंगे चौराहे पे”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता तुम उसकी चिंता ना करो, तुम आजाना”

फिर से रफीक भाई ने कहा “अगर कुछ प्रोब्लम हो तो मैं ही आता हु तुम्हारे घर”

मैने कहा “रफीक भाई, बुरा मत मानो लेकिन आप का 

मेरे घर आना ठीक नही होगा, क्यों के सासुमा तो बाहर है और अड़ोस पड़ोस की महिलाए बाहर ही बैठ ती है, मुझे माफ करना, मैं ही आती हु आप के घर, वैसे भी आप का घर तो बड़ा और एक कोने में है, पिछली गली में, ओर आस पास कोई नही होता” 

रफीक भाई ने कहा “ohh, तो श्वेता, तुम्हे मेरा घर भी मालूम है”

मैने कहा “हा, रफीक भाई, एक दिन सासुमा ने ही दिखाया था”

रफीक भाई ने कहा “कोई बात नही श्वेता, तुम्हारी बात भी सही है तुम ही आना मेरे घर”

मैने कहा “रफीक भाई, तो मैं शाम को आप के ही घर आरही हु” रफीक भाई ने कहा “जरूर श्वेता मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा”

उनके ऐसा कहने से ही मेरे बदन में जैसे आग लग गई थी।

मैं समझ गई थी कि आज तो रफीक भाई मुझे जरूर चोदेंगे।

फिर से रफीक भाई का मेसेज आया “श्वेता, अगर तुम्हे रात अकेली नहीं रहना तो तुम मेरे घर रात को रह सकती हो”

मैने कहा “humm देख ते है”

मैंने दोपहर में ही अपने बदन के अनचाहे बालों को साफ किया और नई ब्रा पेंटी निकाल कर पहन ली। साथ ही के मैने साड़ी भी पहली।

मेरे मन में तरह तरह के ख्याल आ रहे थे और अंदर डर के साथ साथ एक गुदगुदी सी मची हुई थी। काफी सालों के पहली बार चुदने के खयाल ही मुझे अजीब सा आंनद दे रहा था। मुझे मालूम था के आज जरूर कुछ होगा, आज बातो बातो मै जरूर मेरी चुदाई होगी, मैं भी पूरी तरह तयार थी।

वो जुलाई का महीना था बाहर बारिश हो रही थी। बारिश और उसके वजह से ठंडा माहोल बन गया था।

मैने शाम को खीर बनाई, ओर कुछ पर्सनल समान मैने मेरे साथ लिया और रफीक भाई के घर निकली।

मैने आज पंजाबी ड्रेस पहनी थी, अब शाम के ६ बजे थे, लेकिन बाहर अचानक बारिश शुरू हुई, मैने छाता लिया था लेकिन फिर भी भीग गई। अब रफीक भाई का घर आते आहे मैं तो काफी भीग गई, खैर।

फिर मैं ने रफीक भाई का गेट खोला अंदर गई और बेल बजाई, रफीक भाई ने भी दरवाजा खोला और हम दोनों कमरे में आ गए।

मैने खीर का डिब्बा उनको दिया और स्माइल क्या।

रफीई भाई ने तुरंत ही डब्बा खोल के खीर थोड़ी चखी और कहा “लाजवाब बनी है, एक दम स्वीट, हा लेकिन आप जादा स्वीट हो”

मैने कहा “चलो, नॉटी, बदमाश कहिके, आप कुछ भी बोलते हो” फिर हम दोनो में थोड़ी बाते हुई।

रफीक भाई ने पूछा ” श्वेता जी, आप पहली बार आए हो मेरे घर तो क्या लोगे आप, शरबत, चाय या ड्रिंक” ड्रिंक कहते वक्त उन्होंने आंख मारी।

मैने भी हल्का सा हाथ उनके कंधे में लेके प्यार से मारा।

मैने कहा “रफीक जी मै तो बस चाय लूंगी”

रफीक जी ने कहा “चलो मैं बनाता हु”

मैने कहा “चलो हटो मैं ही बनती हु”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता जी, आप काफी भीग चुकी हो, टॉवल से पोचो मैं तब तक चाय बनाता हु, आज आप मेरे हाथ की चाय पियो”

मैने ठीक है कहा, ओर टॉवल से आपने आप को पोछने लगी। मै दूसरे रूम में थी, आईने में देखा तो मेरा पंजाबी ड्रेस इतना भीग चुका था के मेरे स्तनों की चूसनी दिख रही थी। वोही मैं बोलूं के रफीक भाई घड़ी घड़ी कहा देख रहे थे तो वो मेरे भीगे हुवे ड्रेस के दिख ने वाले स्तनों के चूसनी देख रहे थे।

फिर हम ने चाय पी, तभी मेरा मोबाइल बजा देखा तो सासु मां का था, मैने रफीक भाई को चुप बैठ ने कहा।

ओर फोन स्पीकर पे डाला था।

सासुमा ने कहा “श्वेता बेटी, सब ठीक है ना, दी क्या खीर रफीक भाई को”

मैने कहा “हा मांजी मैने दि उनको खीर”

सासुमा ने कहा “मैं आज रात नही आऊंगी, तो अगर तुझे jada डर लगा तो तू किसी को बुला या रफीक भाई के घर जा, कोई प्राब्लम नही है”

मैने कहा “मां जी आप चिंता ना करे”

सासुमा ने कहा “अरे बेटी, वैसे भी रफीक भाई हमारे पुराने दोस्त है, वे भी अकेले ही रहते, उनके बच्चे तो सब दुबई में है, तो कोई प्राब्लम नही”

मैने ने कहा “देख ती हु, आप चिंता ना करे”

सासुमा ने कहा “अच्छा देख ले तू, जो तू ठीक समझे, सुन एक काम है, साडे सात बजे एक आदमी आयेगा प्रताप नाम है उसका उसे एक पार्सल देना जो मैं गलती से भूल गई टीवी पे, वो लेके आयेगा हमारे सत्संग में”

हमारी फोन की बाते रफीक भाई भी सुन रहें थे, स्पीकर जो ऑन था फोन का।

मैने ठीक है करके कहा, घड़ी में देखा तो अब सात बजे थे, 

मैने वो पैकिंग जो मेरे साथ लाया था वो रफीक भाई के हाथ दिया और कहा संभाल के रख ना, खोलना मत इसे। 

रफीक भाई ने पूछा “क्या है इसने”

मैने कहा “चलो मैं चलती हु”

उहोंने वो पैकिंग रख दिया।

मैं तुरंत ही निकली घर आने।

मैने रफीक जी से बाय करके निकल गई। बाहर अभी भी बारिश हो ही रही थी। मै घर आई। वो सत्संग का आदमी आया वो भी अपना पार्सल लेके गया।

अब फिर से मैं अकेली थी, दरवाजा खोल के देखा तो मेरे भी आजू बाजू कोई नही था। शायद पड़ोस वाले किसी प्रोग्राम के लिए गए थे। 

अब रात के ९ बजे थे।

रफीक भाई का मेसेज आया “श्वेता सब ठीक”

मैने कहा “हाजी, सब ठीक”

रफीक भाई “तुम्हे आना हो तो आ सकतीं हो”

मैने कहा “देखती हु”

रफीक भाई “तुम बताना कभी भी फोन करना”

फिर अब रात के १० बजे।

मैने रफीक भाई को मेसेज किया “hi”

रफीक भाई “बोलो श्वेता”

मैने कहा “मैं आती हु”

रफीक भाई ने कहा “ठीक है आजो”

मैने देखा आजू बाजू कोई नही था, घर का काम पुरा होते होते अब १०.३० बजे और मैं निकली रफीक भाई के घर।

मुझे क्या हुआ पता नही लेकिन इस बार मैंने साड़ी पहनी और चली गई रफीक भाई के घर। अभी भी बाहर जोरोस बारिश हो रही थी।

उस वक्त मुझे बेहद डर लग रहा था, दिल की धड़कन तेजी से चल रही थी और पैर कांप रहे थे। मैंने पहले ऐसा कभी नहीं किया था इसलिए मुझे डर लग रहा था कि किसी को पता न चल जाये।

अब मै रफीक भाई के घर गई, छाता था लेकिन मैं फिर भी पूरी गीली थी। रफीक भाई के घर गई, दरवाजे की बेल दबाई, रफीक भाई ने दरवाजा खोला। 

उहोंने देखा तो मैं पूरी तरह भीगी हुई थी।

हैमनवेक दूसरे को स्माइल किया।

रफीक ने कहा “अरे श्वेता तुम तो पूरी तरह भीगी हो”

मैने कहा “हाजी रफीक भाई”

रफीक भाई ने कहा “इसे अपना ही घर समझो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाता हु”

मैने कहा “रफीक भाई, ठीक है”

मै दूसरे रूम में गई और गीली साड़ी को पिलाने लगी,

मेरी चूड़ियों की आवाज रफीक भाई को सुनाई दे रही थी, वो बीच बीच में मेरी ओर देख रहे थे, मेरे गीले बदन को देख रहे थे ये मैं जानती थी।

फिर मैं साड़ी ठीक ठाक करके रफीक भाई के किचन में गई, हमने थोड़ी इधर उधर की बाते की, साथ ही में हम दोनो चाय पी रहे थे।

फिर अचानक रफीक भाई और मैने एक दूसरे के आखों में देखा, इस वक्त हम दोनो एक सुसरे को कामुक नजर से देख रहे थे। 

तभी रफीक भाईने मेरे बाजुओं को पकड़ा और मेरे मारे माथे को चूमा और कहा “काश मैं मैं”

उनके मेरे माथे पे चूमनेसे मुझे कुछ अलग ही तृप्ति मिली, एक सच्चा प्यार दिखाई दे रहा था।

मैने कहा “क्या रफीक भाई, बोलो डरो मत”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता मैं तुम्हे चाहने लगा हु, में तुम्हे पूरा पाना चाहता हु”

मैने कहा “क्यों नही रफीक भाई, अब तो मुझे भी रहा नही जाता, लगता है मैं भी अब आप के प्यार में डूब रही हु, मुझे भी आप का प्यार महसूस हो रहा है, अब तो मैं भी आप का प्यार पाना चाहती हू”।

रफीक भाई ने फिर से मेरी बाजुओं को पकड़ा और फिर से मेरे माथे को चूमा। रफीक भाई आगे बढ़ ही रहे थे मेरे होटों को चूमने ही वाले थे तभी मैंने उनको थोड़ा पीछे लिया और कहा “रफीक भाई रुको”

रफीक भाइने कहा “श्वेता अब रुको किस बात के लिए”

मैने कहा “रफीक भाई, मैने आप को जो पैकिंग दिया है वो कहा है” 

रफीक भाई ने कहा “वो पैकिंग वहा सोफे पे है”

मैने कहा “रफीक भाई मुझे थोड़ा टाइम दो, आप हॉल में ही रुको, क्या मै आप का बेडरूम इस्तेमाल कर सकती हु?।

रफीक भाई ने कहा “श्वेता हा जरूर”

मैने कहा “रफीक भाई आप मेरा इंतजार करना मैं आती हु”

में रूम में गई, साड़ी पहनी हल्का सा मेकअप किया, 

साड़ी तो मेरी नाभी के नीचे ही पहनी थी लो वेस्ट स्टाइल में साड़ी पहनी थी, साथ ही मैं मैने लो नेक ब्लाउज़ भी पहना था, मेरी साड़ी ट्रांसपेरेंट थी, जिसे मेरे ब्लाऊज से स्तन भी उभर कर दिख रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे मेरे दूध कपड़े फाड़कर बाहर आ जायेंगे, ओर घूंघट ओढ़े मैं बाहर आके, दरवाजे पे खड़ी हो गई।

रफीक भाई मुझे देख ते ही रह गए, वो तुरंत ही उठ खड़े हो गए सोफासे, ओर सब लाइट बंद की, दरवाजा बंद किया, मेरे नासदीक आके, मुझे तुरंत ही बेडरूम में लेके गए।

रफीक भाई मुझे देखकर बड़े प्यार से मेरे पास आये और मुझे ऊपर से नीचे तक निहारने लगे।

फिर रफीक अंकल ने मेरे दोनों बाजुओं को पकड़ा और मुझे अपनी तरफ खींचने लगे।

उस वक्त मैं शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी। उस दिन जिंदगी में पहली बार मुझे किसी मर्द ने छुआ था।

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मेरे जिस्म में अजीब सी हलचल मची हुई थी और मेरी चूत में अंदर तक खुजली होने लगी।

मेरे स्तनों की चूसनी निप्पल अपने आप ही सामने की तरफ तन गए और मेरे बदन के रोम खड़े हो गये।

इतनी ठंड और बाहर की बारिश में भी मुझे पसीना आने लगा।

मैं अपनी नजरें नीचे किये हुए थी और रफीक अंकल मुझे अपनी ओर खींचते हुए अपने सीने से लगा लिया।

उन्होंने मेरा घूंघट उठाया, चेहरा ऊपर की तरफ उठाया फिर भी मेरी निगाह नीचे ही रही। मैं उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी।

रफीक भाई अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब लाते जा रहे थे और मैं किसी तरह का कोई विरोध नहीं कर रही थी।

जल्द ही उन्होंने अपने होठ मेरे होंठ पर रख दिये।

वो कभी नीचे के होंठ को तो कभी ऊपर के होंठ को चूमने लगे। उनकी लम्बी दाढ़ी भी हमारे बीच में थी, मेरे पूरे बदन में जैसे करंट की लहर दौड़ पड़ी थी।

रफीक भाई ने एक हाथ से मेरे सर को थामा हुआ था और दूसरे हाथ से मेरी पीठ को सहलाते जा रहे थे।

काफी देर तक उन्होंने मेरे होठों को चूमा एकदम लिप्स लॉक थे हम और फिर उनका एक हाथ पीठ से हटकर मेरी कमर पर चला गया।

अब रफीक भाई ने मेरे साड़ी के पल्लू के अंदर अपना हाथ डाला और मेरी नंगी कमर पर चलाने लगे, साथी ही में मेरी गहरी नाभी में उंगली करने लगे। मैंने अपने हाथ से उनको रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया।

उनके हाथ का स्पर्श जब मेरी कमर पर पड़ा मेरी सांसें और तेजी से चलने लगी।

कुछ देर बाद रफीक भाई ने अपना दूसरा हाथ मेरे सर से हटा कर मेरे साड़ी के पल्लू में घुसा के मेरे भरी स्तनों पे रख दिया, और जैसे ही उन्होंने पहली बार मेरे बड़े स्तनों दूध को दबाया, मैंने उन्हें धक्का दिया और उसके दूर हो गई।

मेरी शर्म को भाम्पते हुए रफीक भाई ने फिर से मेरा हाथ पकड़ा और पीछे की तरफ से मुझे जकड़ते हुए मुझसे लिपट गये।

अब वो मेरे गले को चूमते हुए मेरी पीठ को चूमने लगे और अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों को जकड़ लिए।

मैं उन्हें रोकने की कोशिश करती रही लेकिन रफीक भाई रुकने को तैयार नहीं थे। वे दोनों हाथों से मेरे बड़े बड़े स्तनों को साड़ी के पल्लू के अंदर हाथ डाल के ऊपर से ही मसलने लगे।

कुछ देर तक मैं मचलती रही, फिर चुपचाप खड़ी हो गई।

फिर मुझे अपनी चूतड़ पर कुछ चुभने का अहसास हुआ।

मैं समझ गई कि ये उनका लंड है जो पैन्ट के अंदर से ही खड़ा होकर मेरी गांड में घुसा जा रहा था।

कुछ देर में उन्होंने मेरे साड़ी का पल्लू उतार दिया, साड़ी को निकालना शुरू किया लेकिन मैंने उन्हें रोकते हुए कहा “रफीक भाई, पहले लाइट बंद करिए”

उन्होंने पहले तो मना किया लेकिन मेरे जोर देने के बाद वो लाइट बंद करने के लिए तैयार हो गये।

मैं उनके सामने उजाले में नंगी नहीं होना चाहती थी क्योंकि मुझे बेहद शर्म आ रही थी। रफीक भाई ने तुरंत ही लाइट बंद कर दी और मुझे अपनी बाहों में ले लिया।

उन्होंने एक झटके में ही मेरे साड़ी खींच ली, साथ ही के मेरा ब्लाऊज, ब्रा, के अंदर हाथ डाल के फाड़ दिया,

अब मेरे दोनों बड़े स्तन दूध उनके सामने आजादी से तने हुए थे, अच्छे खासे झूल रहे थे मेरे स्तन।

रफीक भाई ने फिर दोनों हाथो में मेरे दोनों स्तनों को थामा और उन्हें मसलते हुए निप्पल को अपने मुंह में भरकर चूसने लगे।

मैं बस ‘ohh रफीक बेटे, ohh डियर ऊऊऊ ऊऊ ऊई ईईई आहाह आआह ऊऊफ़ आआऊच आआह ओह ओह ओह’ करती जा रही थी और रफीक भाई बड़े प्यार से मेरे दोनों दूध चूस रहे थे।

यकीन मानिए उस वक्त तो जैसे मैं हवा में उड़ रही थी क्योंकि मुझे नहीं पता था कि कोई स्तनों के दूध को इस प्यार से चूसता है तो इतना मजा आता है क्यों के ऐसा तो तो मेरे स्वर्गवासी पति ने भी चूसा था।

मैं बस उस मजे का पूरा आनंद ले रही थी। मेरी हॉट बुर सेक्स के लिए मचल रही थी।

जल्द ही रफीक भाई ने मेरे साया पेटीकोट का नाडा खींच दिया और मेरी साया पेटीकोट को नीचे ऐसे खींचा तो मेरा साया पेटीकोट मेरे पैरों पर जा गिरा। अब मैं केवल चड्डी पहने हुए उनके सामने थी।

वो जोर जोर से मेरे स्तनों दूध को मसलते हुए चूस रहे थे और मैं उनके सर को थामकर अपने स्तन दूध में दबाए जा रही थी।

जल्द ही रफीक भाई भी अपने कपड़ों को निकाल दिया और मुझसे लिपट गए। जब वो उनका नंगा बदन मेरे नंगे बदन से टकराया, यकीन मानिए, मुझे जोर से करंट लगा मैंने भी उनको थाम लिया और अपने बदन पर चिपका लिया। अब उनकी लंबी सफेद दाढ़ी भी मेरे स्तनों के बीच में खेलने लगी।

उस ठंड भरी बारिश के रात में हम दोनों के गर्म बदन का मिलन एक अलग ही मजा दे रहा था। मैं भी अपने हाथों को उनके बदन पर चलाने लगी।

अब मेरे अंदर की जो शर्म थी वो अंधेरे के कारण गायब सी हो गई थी। कुछ ही देर में रफीक भाई ने मेरी निकर और अपनी चड्डी भी निकाल दी और अब हम दोनों ही नंगे हो गए थे।

रफीक भाई का एक हाथ मेरी चूत पर गया और चूत पर उनका स्पर्श पाकर मुझे बेहद मजा आया। वो बड़े प्यार से मेरी चूत को अपने हाथों से सहला रहे थे।

मेरी चूत से उस वक्त पानी निकल रहा था जिसे अंकल चूत के चारों तरफ लगा रहे थे।

रफीक भाई ने मेरा एक हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और लंड को छूते ही मैंने अपना हाथ हटा लिया।

उनका लंड इतना गर्म लंबा था कि अंधेरे में मुझे लगा पता नहीं ये क्या चीज है।

लेकिन रफीक भाई ने दुबारा मेरा हाथ पकड़ा और लंड पर रख दिया। कुछ संकोच के बाद मैंने उनका लंड थाम लिया।

उनका लंड बेहद गर्म होने के साथ साथ काफी मोटा लंबा भी था, क्यों ना हो उनकी हाइट ही इतनी ऊंची थी। मैं अपने हाथ को आगे पीछे करते हुए उनके लंड को सहलाने लगी।

जल्द ही रफीक भाई के लंड का सुपारा मेरे हाथ में आ गया जो कि काफी चिपचिपे पानी से भरा हुआ था। मैं भी उनके गाढ़े चिपचिपे पानी को उनके लंड के ऊपर लगाते हुए सहलाने लगी।

उस वक्त तक हम दोनों ही काफी गर्म हो चुके थे और मुझे लग रहा था कि कितनी जल्दी रफीक भाई अपना लंड मेरे अंदर डाल दें।

लेकिन रफीक भाई इस खेल में काफी माहिर थे और वो इतनी जल्दी मुझे नहीं चोदने वाले थे।

कुछ देर में ही वो मुझसे अलग हुए और जल्दी से जाकर लाइट चालू कर दिए।

उनके लाइट चालू करते ही मैं अपना नंगा जिस्म उनसे छुपाने के लिए कुछ कपड़े देखने लगी।

लेकिन रफीक भाई ने तुरंत आकर मुझे अपने से चिपका लिया और बोले “श्वेता, अब शर्म मत करो, जो भी होना है, हो जाने दो”।

और वो रफीक भाई मुझे ऊपर से नीचे तक देखने के बाद बोले “श्वेता जी, तुम कमाल की दिख रही हो, एकदम नई नवेली हाउसवाइफ, आप मुझे इतनी पसंद हो कि आपके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ। श्वेता जी, आप का तुम्हारा भरा हुआ बदन मुझे बहुत पसंद है।”

मैने कहा “रफीक भाई, आप मुझे प्लीज, जी बी ना बोले, में चाहती हू के आप”

रफीक भाई ने कहा “श्वेता जी, कहो फिर”

मैने कहा “रफीक भाई, अगर बूरा ना मानो तो क्या आप मुझे” 

रफिक भाई ने कहा “बोलो श्वेता जी”

मैने कहा “रफीक भाई, क्या आप मुझे मम्मी बुला सकते हो, प्लीज, मैं आज एक अनोखा आनंद लेना चाहती हू”

रफीक भाई भी खुश हुवे और कहा “हा श्वेता जी, लेकिन एक शर्त पर” 

मैने कहा “रफकी भाई, बोलो कोसी शर्त”

रफीक भाई ने कहा “तो श्वेता जी, आप भी मुझे रफीक नाम से बोलो, आप मुझे रफीक बेटे नाम से बोलो, आज मैं भी जवान बनाना चाहता हु”

रफीक भाई ने मुझे पलट दिया और मुझसे पीछे से लिपट गए। वो मेरी पीठ को चूमते हुए मेरे स्तनों दूध को दोनों हाथों से मसलते हुए फिर से मेरे स्तन चूसने लगे।

मैने भी “ohh रफीक बेटे, ohh डियर इतना भी ना काटो मुझे के तुम्हारे निशान बने मेरे स्तनों पर”

रफीक भाई ही कहा “मम्मी, तुम इतनी लाजवाब हो के आज मैं मेरी सब पचपन की इच्छा पूरी करूंगा”

मै भी “ohh बेटे, थोड़ी तो सब्र कर, शर्म आ रही है मुझे”

रफीक भाई अपने एक हाथ को नीचे मेरी चूत पर ले गए और चूत को सहलाने लगे।

ऐसे ही करते हुए वो मुझे बिस्तर पर ले गए और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर आ गए। अब रफीक भाई मेरे गालों और गले को चूमते हुए नीचे की तरफ जाने लगे।

कुछ देर मेरे दोनों स्तनों को चूमने के बाद वो मेरी नाभि तक जा पहुंचे और मेरी नाभि में अपनी जीभ डालकर चाटने लगे। “उफ्फ रफीक बेटे, ohh तुम भी लाजवाब हो, एकदम माहिर हो तुम तो।”

इसके बाद रफीक भाई मेरे दोनों पैरों को फैलाया और मेरे दोनों चिकनी जांघों को चाटने लगे।

कुछ देर बाद रफीक भाई ने अपना मुंह मेरी चूत पर रख दिया और मेरी चूत को पहले अपनी जीभ से चाटने लगे.

और फिर रफीक भाई ने मेरी चूत को अपने मुँह में भर लिया।

मैं उस वक्त बहुत ज्यादा मचलने लगी और बिस्तर पर लोटने लगी। उस वक्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं हवा में उड़ रही हूं मुझे इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि उस पल को शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

रफीक भाई ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ के नीचे लगाकर मेरी गांड को हवा में उठा लिया और मेरी चूत को बड़ी बेदर्दी से चूसने लगे। मैं उस मजे को ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और उनके मुँह में ही झड़ गई।

लेकिन रफीक भाई ने मुझे अभी भी नहीं छोड़ा और लगातार मेरी चूत चाटते रहे। कुछ ही पल में मैं दुबारा से गर्म हो गई और फिर मजे से चूत चटवाने लगी।

रफीक भाई ने मुझे नंगी करके मेरे हर एक अंग को चूमा चाटा और मुझे जन्नत की सैर करवाई। उनके चूत चाटने से मैं एक बार झड़ भी चुकी थी लेकिन रफीक भाई मेरी चूत को बिना रुके बस चाटते जा रहे थे।

एक बार झड़ने के बाद मैं फिर से गर्म हो गई थी और उस मजे का पूरा आनंद उठा रही थी। लेकिन मुझे पता नहीं था कि रफीक भाई ने अभी तक मुझे जितना मजा दिया था आगे मुझे उतनी ही तकलीफ होने वाली थी।

रफीक भाई अपनी जीभ मेरी चूत पर इस तरह से चला रहे थे जैसे कि वो मलाई चाट रहे हों। बीच बीच में रफीक भाई मेरी चूत को अपने मुंह में भर लेते और मेरी चूत के पानी को बिल्कुल चूस लेते। मैने कहा “बेटे रफीक तुम तो बड़े ही अच्छे चूत चुसाई करते हो, क्या तुम मेरा पूरा पानी पियोगे बेटे” रफीक भाई ने कहा “हा मम्मी मैं तो आज तुम्हारी पूरी चूत पी लूंगा, i love you mummy, my lovely mummy”

काफी समय तक रफीक भाई मेरी चूत को ऐसे ही चाटते रहे, फिर जब उन्हें समझ में आ गया कि मैं पूरी तरह से गर्म हो गई हूं तो उन्होंने मेरी चूत को छोड़ दिया।

अब रफीक भाई मेरे दोनों पैरों को फैला दिया और दोनों पैरों के बीच में बैठकर अपने लंड को आगे पीछे करते हुए सहलाने लगे।

मैं समझ गई थी कि अब रफीक भाई मुझे चोदने वाले हैं। मैं तिरछी नजरों से उनके काले मोटे लंड को देख रही थी।

वे लंड को आगे पीछे कर रहे थे और उनका बड़ा सा सुपारा बड़ा तना हुआ बाहर निकल रहा था।

रफीक भाई के लंड की नसें काफी उभरी हुई थी जिससे उनका लंड और भी ज्यादा भयानक दिख रहा था।

मैं अंदाजे से ही बता रही हूं लेकिन उनका लंड 7 इंच से ज्यादा ही होगा था।

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कुछ देर तक रफीक भाई ने अपने लंड को सहलाया फिर वो इधर उधर देखने लगे और उठकर तेल की शीशी ले आये। वो समझ गए के काफी सालों से मैं चूदि नही हु।

मैने कहा “बेटे, यह क्या”

रफीक भाई ने कहा “मम्मी, मैं आप को कोई तकलीफ नहीं देना चा हता”

फिर रफीक भाई ने अपने लंड और मेरी चूत पर काफी सारा तेल लगाया और मेरे ऊपर लेट गए।

रफीक भाई ने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर अपने लंड को चूत में लगाया और मेरे स्तनों दूध को चूमते हुए अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर लेजाकर मुझे जोर से जकड़ लिया।

अब रफीक भाई ने पहली बार जोर लगाया और लंड चूत में डालने की कोशिश की, लेकिन लंड फिसल गया और मेरे पेट की तरफ आ गया।

उन्होंने फिर से लंड मेरी बुर के छेद पर सेट किया और इस बार लंड को थोड़ी देर पकड़े रहे। जब लंड का सुपारा छेद में अच्छे से सेट हो गया तो उन्होंने मुझे फिर से जकड़ लिया।

अब रफीक भाई ने जोर लगाया और लंड मेरी बुर में फिसलता हुआ अंदर जाने लगा।

अचानक से रफीक भाई लंड के सुपारे ने मेरे छेद को फैलाया और अंदर चला गया। उस वक्त मुझे थोड़ा ही दर्द महसूस हुआ।

मैं सोच रही थी कि रफीक भाई ऐसे ही आराम से मेरी बुर में लंड डालते जाएंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

अब रफीक भाई ने वो किया जिसके लिए मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। रफीक भाई ने अपनी ताकत लगाकर एक बार में ही अपना लंड मेरी बुर में पेल दिया।

रफीक भाई का लंड मेरी बुर को चीरता हुआ पूरा अंदर तक घुस गया। मुझे ऐसा लगा कि किसी ने गर्म रॉड मेरी बुर में डाल दिया है।

मेरी आंखों के सामने पूरी तरह से अंधेरा छा गया और मैं जोर जोर से रोते हुए बोली “मम्मीई ईईआ आआआ आआ आआह आआ निकालो आआआआ नहीं इईईई! निकालो निकालो आआह!”

मैं बहुत बुरी तरह से रो रही थी और चिल्ला रही थी।

रफीक भाई ने तुरंत ही अपने एक हाथ से मेरे मुँह को दबा लिया और मेरी आवाज निकलना बंद हो गई।

आज मुझे अनोखा आनंद था के एक मूसल लंबा बड़ा लंड मैं आपने चूत में ले रही थी। 

उस वक्त मेरी आँखों से बस आंसुओं की धार निकल रही थी और मेरा सारा मजा भयंकर दर्द में बदल गया था।

मेरी दोनों जांघें बुरी तरह से कांप रही थी जैसे उनमें करंट लग गया हो।

मैं अपने हाथों को बिस्तर पर जोर जोर से पटक रही थी और रफीक भाई की आँखों में देखते हुए बस यही दुआ कर रही थी कि किसी तरह से रफीक भाई अपना लंड बाहर कर लें।

लेकिन रफीक भाई मुझे बुरी तरह से दबाए हुए थे और मैं उनके वजन के कारण हिल भी नहीं पा रही थी।

इसी दौरान उन्होंने लंड आधा बाहर किया और फिर से अंदर पेल दिया।

इस बार लंड पूरी तरह से बुर को फाड़ चुका था और अंदर अच्छी तरह से सेट हो गया था।

मेरा दर्द कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था और मैं किसी तरह से उस भयंकर दर्द को बर्दाश्त कर रही थी।

मैं कुछ बोल भी नहीं पा रही थी क्योंकि रफीक भाई ने मेरे मुँह को बुरी तरह से बंद कर रखा था।

रफीक भाई ऐसे ही लंड को मेरे अंदर डाले हुए मेरे ऊपर लेटे हुए थे और अपने भारी भरकम शरीर के नीचे मुझे दबाए हुए थे।

बीच बीच में रफीक भाई अपनी कमर को हल्के से हिलाते लेकिन लंड बाहर नहीं निकाल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे रफीक भाई अपने लंड से मेरी चूत में जगह बना रहे हो।

मेरे दोनों स्तन उनके सीने के नीचे बुरी तरह से दबे हुए थे जिसकी वजह से मेरे स्तनों में भी काफी दर्द हो रहा था।

साथ ही में उनकी लंबी दाढ़ी मेरे स्तनों के बीच में थी इस कारण मुझे गुदगुली भी हो रही थी।

रफीक भाई अपने दोनों घुटनों से मेरी दोनों जांघों को बुरी तरह से दबाया हुआ था जिससे मैं हिल तक नहीं पा रही थी। करीब दस मिनट तक मुझे इतना भयानक दर्द हुआ जिसको मैं शब्दों में बया नहीं कर सकती।

लेकिन उसके बाद बड़े आश्चर्यजनक रूप से मेरा दर्द कम होने लगा और जल्द ही मेरा सारा दर्द जैसे हवा हो गया।

अब बस मैं चाहती थी कि रफीक भाई अपना वजनी शरीर मेरे ऊपर से हटा लें और मुझे राहत मिले।

धीरे धीरे रफीक भाई ने मेरे मुँह से अपना हाथ हटाया।

जैसे ही उन्होंने हाथ हटाया मैं बोल पड़ी “ohh रफीक बेटे हटो ना, ऊपर से बहुत दुख रहा है, तुम्हारा शहरी तो बड़ा ही वजनदार है”।

मेरी आवाज को रफीक भाई ने जैसे भांप लिया था कि मुझे अब चूत में दर्द नहीं हो रहा है।

उन्होंने तुरंत ही मुझे ढीला छोड़ दिया लेकिन अपना लंड बाहर नहीं निकाला।

उनके वजनी शरीर का वजन अब मेरे ऊपर नहीं था और मुझे अब काफी राहत महसूस हो रही थी।

अब रफीक भाई ने मेरे गालो को चूमते हुए मुझसे पूछा- “मम्मी अब दर्द तो नहीं हो रहा है न?”

मैंने अपना सर हिलाते हुए उनको ना में उत्तर दिया।

अब रफीक भाई ने अपना लंड आधा बाहर करते हुए धीरे धीरे अंदर करने लगे।

अभी तक जहाँ मेरे मुँह से चीखें निकल रही थी वहीं अब मेरी सिसकारियां निकलने लगी थी आआह आओआ ह आआह ऊऊऊऊह ऊऊ श्सऊ ऊऊऊ आआह आआह!

मैने कहा “ओह बेटे, ओर चोदो मुझे दो मुझे आज इस जीवन का परमानंद”।

रफीक भाई ने कहा “हा मम्मी आज मैं भी इस कामक्रीड़ा में परमानंद महसूस कर रहा हु”

मेरे हाथ अपने आप ही रफीक भाई की पीठ पर चलने लगे और उन्हें अपने सीने की तरफ खींचने लगे।

मेरी चढ़ती जवानी को जिसकी जरूरत थी आज मुझे वो मिल रही थी और मैं दुनिया को भूलकर उस पल का मजा ले रही थी।

पहले तो रफीक भाई धीरे धीरे लंड डालते हुए मुझे चोद रहे थे लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी रफ्तार तेज करनी शुरू कर दी।

जल्द ही मेरा पलंग बुरी तरह से हिलने लगा और रफीक भाई के जोरदार धक्के मेरे पेट पर पड़ने लगे जिससे पूरे कमरे में चट चट की आवाज गूँज उठी।

रफीक भाई ने अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर लेजाकर मुझे थामे हुए थे और मुझे अपने सीने पर चिपकाए हुए थे।

वे काफी अच्छे से मुझे बाहों में लपेटे हुए थे और दनादन मेरी चुदाई किये जा रहे थे।

जल्द ही मेरी चूत इतनी ज्यादा गीली हो गई जिससे बेहद ही गंदी सी आवाज कमरे में गूंज उठी।

फच फच फच की आवाज़ के साथ रफीक भाई मेरी चूत को बुरी तरह से चोद रहे थे।

करीब पंद्रह मिनट तक बिना रुके रफीक भाई मुझे चोदते रहे।

मैं “रफीक बेटे, ओर तेज और तेज चोदो मुझे मजा आ रहा है आआह आओआ ह आआह ऊऊऊऊह ऊऊ श्सऊ ऊऊऊ आआह आआह”

रफीक भाई “yess मम्मी, ये ले और ले पूरा ले इसे अंदर”

जल्द ही मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं झड़ गई उसके कुछ ही देर बाद रफीक भाई भी मेरे अंदर ही झड़ गए।

हम दोनों का बदन बुरी तरह से पसीने से भीगा हुआ था, फिर भी हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे और बिस्तर पर लेटे हुए थे।

कुछ देर बाद रफीक भाई मुझसे अलग हुए और बगल में लेट गए।

बाद में रफीक भाई ने ही एक कपड़े से मेरी चूत और अपने लंड को साफ किया!

उसके बाद बारी बारी से जाकर हम दोनों ने बाथरूम में पेशाब किया।

बस उसके बाद तो दोस्तो, पूरी रात हम लोग सोये ही नहीं और एक के बाद एक दौर चलता रहा। पूरी रात में पांच बार हम लोगों ने चुदाई की।

रफीक भाई अलग अलग पोजीशन में मुझे चोदते रहे कभी घोड़ी बनाकर कभी खड़े करके। कभी मुझे अपने ऊपर लेकर तो कभी मुझे गोद में उठाकर!

अलग अलग तरह से मैं बस चुदती जा रही थी।

उस रात रफीक भाई ने मेरे बदन की पूरी गर्मी निकाल दी थी।

अगली सुबह मैंने रफीक भाई को अंदर के कमरे में सुला दिया और मैं उनके ही घर का काम करने लगी।

इस दौरान मेरी बगल वाली भाभी भी मेरे घर आई लेकिन मैं उनके सामने बिल्कुल सामान्य तौर से ही रही और मेरा हालचाल जानकर वो चली गई।

उसके बाद मैंने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और मैं और रफीक भाई ने साथ में ही नहाए। नहाते समय भी रफीक भाई ने बाथरुम मेरी गांड चुदाई भी की। 

रफीक भाई ने मेरी चूत और गांड पूरी तरह से फैला दी।

साड़ी पहनते वक्त मैने देखा तो मेरी जांघें और गांड लाल लाल दिख रही थी, रफीक भाई ने इतने फटके मेरे थे मुझे चुदाई के।

उसके बाद हम दोनों ने खाना खाया और रात की नींद पूरी करने के लिए सो गए। तब मैंने कहा “रफीक भाई, मैं आप की शुक्रगुजार हु के आप ने आप का बड़े लंबे मूसल लंड से, मेरी अन्तर्वासना और कामुकता पूरी की।

रफीक भाई ने कहा “हा श्वेता, मैं भी तेरा शुक्रगुजार के

तुम्हारे जैसे संस्कारी औरत भी इतनी सालो के बाद मुझे चुदाई का मौका दिया।

शाम को भी मैंने रफीक भाई को अंदर के कमरे में ही रखा और रात होते ही एक बार फिर से हम दोनों के बीच चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया।

उस रात भी रफीक भाई ने मुझे चार बार चोदा और अगली सुबह जल्दी ही मैं उनके घर से निकल गई।

उनके साथ दो दिन बिताने के बाद मेरी जिंदगी ही बदल गई। अब मैं चुदाई के लिए पागल सी रहने लगी।

मेरे बदन की आग जैसे और ज्यादा बढ़ गई थी।

मैं इतनी ज्यादा निडर हो गई थी कि रात में रफीक भाई से फोन पर बात करने के बाद मैं पीछे के दरवाजे से बाहर निकल जाती।

मेरे घर के पीछे ही एक टूटी हुई स्कूल की बिल्डिंग थी जहाँ पर जाकर मैं रफीक भाई से मिलती।

वहाँ जाकर रफीक भाई मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर सलवार नीचे कर देते और मुझे दीवाल से टिका कर घोड़ी बनाकर मेरी चुदाई करते।

हर एक दो दिन में हम लोग उस स्कूल की बिल्डिंग में मिलने लगे जो हमारे चुदाई का अड्डा बन गया। लेकिन वहाँ पर जल्दी जल्दी में ही चुदाई करनी पड़ती थी।

इसके बाद मैं और रफीक भाई दिन में जंगल में जाने लगे।

मैं अपने दोस्तों को मिलने के बहाने से निकलती और रफीक भाई के साथ जंगल चली जाती थी जहां पर हम लोग दिन भर रहते थे और एक दूसरे की प्यास बुझाते थे।

जंगल में रफीक भाई मुझे पूरी तरह से नंगी कर देते थे और हम लोग चुदाई का भरपूर मजा लेते थे।

लेकिन बाद में हमने स्कूल, या जंगल जाना बंद किया और एक दूसरे को घर में ही चुदाई करने लगे। एक मूसल लंड लेनेका आनंद क्या होता है यह रफीक भाई से पता चला। 

वैसे भी, मेरे गर्भवती होने का कोई सवाल ही नहीं था, डॉक्टर ने मुझे पहले ही कहा था कि तू अब गर्भवती नही हो सकती , मेरी चूत अब रफीक भाई के विशाल लंड के लिए तैयार थी।

चार साल तक मेरे और रफीक भाई के बीच ये सब चलता रहा और उन चार सालों में हम दोनों ने चुदाई का भरपूर मजा लिया।

हम लोग बाप बेटी, मां बेटा, बहु ससुर बन के एकदुसरे से चुदाई करने लगे।

अब हम लोग अपनी अपनी जिंदगी में खुश हैं लेकिन आज भी मुझे रफीक भाईकी याद आती है।

दोस्तो, मेरी जिंदगी की यह सच्चाई है जिसे मैं आप लोगों के बीच पेश करना चाहती थी।उम्मीद करती हूं कि आप लोग मेरी जिंदगी की इस कहानी को पसंद करेंगे।

धन्यवाद।

आपकी कोमल मॉम ( . )( . )

Email I’d : komal_f40@rediffmail.com

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