Drishyam, ek chudai ki kahani-16
कुछ देर बाद अर्जुन को दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी। जब उसने दरवाजा खोला तो सिम्मी को वहाँ खड़ा पाया। सिम्मी ने कमरे में आ कर अर्जुन के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “ठीक है, तुम जब मुझे इतना कह रहे हो तो फिर मैंने सोचा की तुम्हारी बात भी ठीक है। कालिया को कहो की मैं उससे मिल लुंगी। वह मुझे दोपहर को जब चाचाजी चले जाएँ तब दूकान पर कल मिले। मैं उससे बात करती हूँ।” सिम्मी ने जानबूझ कर अर्जुन से कालिया को घर बुलाने की बात नहीं कही। उसने सोचा की अर्जुन ही अगर यह बात कहे तो सही रहेगा। सिम्मी की बात सुनकर अर्जुन के मन का मोर मन ही मन में नाचने लगा। अब अर्जुन का शातिर दिमाग ओवर टाइम काम करने लगा। एक तरफ उसे सिम्मी को कालिया के तगड़े लण्ड से चुदवाते हुए देखने की प्रबल इच्छा थी। तो दूसरी और …