लंड की प्यासी मेरी चूत

दोस्तों प्यार भरा नमस्ते.. सेक्सी कहानी पढ़ने वालो को वालो को मेरा नमस्कार. दोस्तों मैं आज पहली बार अपनी स्टोरी देशीअडल्टस्टोरी डॉट कॉम  पर शेयर करने जा रही हूँ. मेरा नाम सुदीप्ति है और मेरी उम्र 21 साल है.. मैं दिखने में बहुत सेक्सी और हॉट हूँ. दोस्तों मैं अपने बारे में सिर्फ़ इतना ही कहूँगी कि कोई भी मुझे एक बार देखने के बाद बार बार चोदने के बारे मैं सोचेगा. हमारे गद्देदार चूतर अलग से दिखाई देते है..

मित्रगणों, यह बात दो दिन पहले की है जब हमारे घर पर मेरी एक बहुत अच्छी फ्रेंड आई.. जिसका नाम सुरेखा है. उसने आकर मुझसे कहा कि आज मैं बहुत खुश हूँ. तो मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो सुरेखा ने कहा कि आज हमारे बॉयफ्रेंड ने मुझे किस किया और हमारे बूब्स को भी दबाया. फिर मैंने कहा कि सुरेखा कैसा लगता है जब कोई लड़का ऐसा करता है तब? तो सुरेखा ने कहा कि सुदीप्ति मेरी छाती में थोड़ा दर्द हुआ.. लेकिन जब वो मुझे किस कर रहा था.. उफ़फ्फ़ पूछो मत हमारे शरीर में तो जैसे आग लग गई थी. फिर उसने मुझसे बहुत सारी सेक्स की बातें की. वो कुछ बातें तो मैं भी जानती थी और कुछ नई बातें उसने बताई और बातें करते करते मेरा तो पानी ही निकलने लगा और मैं भी सोचने लगी कि मुझे भी अब किसी के साथ सेक्स करना है.

हमारे एक पड़ोसी है.. जो कि गुजराती फेमिली है.. लेकिन उस फेमिली मैं एक बहुत ही स्मार्ट और हेंडसम लड़का है.. जिसका नाम विनोद है और फिर मैंने सोचा कि यार पास में ही विनोद है तो मुझे कहीं दूर जाने की ज़रूरत नहीं है. मैंने दूसरे दिन सुरेखा को घर पर बुलाया और कहा कि मुझे कुछ टिप्स दो विनोद के लिए.. जिससे मैं उसे चोदने के लिए तैयार कर लूँ. फिर सुरेखा ने कहा कि अरे सुदीप्ति वो एक गुजराती है.. तो मैंने कहा कि यार चूत को क्या पता कौन हिंदू कौन गुजराती उसको तो सिर्फ लंड से मतलब है. तो सुरेखा ने कहा कि ठीक है मैं जैसा बोलूं वैसा कर और फिर मैंने सुरेखा की टिप्स आज़माने शुरू किए और एक दिन मैं विनोद के घर गई और अंकल आंटी से हेलो किया. विनोद मेरा फ्रेंड था.. लेकिन अच्छा फ्रेंड नहीं हमारी सिर्फ कभी कभार कुछ कुछ बातचीत होती रहती थी. फिर मैं विनोद से मिली और मैंने विनोद से कहा कि तुम आज शाम को घर आ जाओगे? मुझे तुम्हारी थोड़ी मदद चाहिए.. तो उसने कहा कि क्या? फिर मैंने कहा कि कॉलेज के कुछ काम में तुम्हारी मदद चाहिए. तो उसने कहा कि ठीक है.. मैं शाम को तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा.

हमारे मम्मी, पापा को विनोद से मेरी ज़्यादा बातचीत पसंद नहीं है. इसलिए मैंने विनोद को शाम को घर बुलाया.. क्योंकि हमारे मम्मी, पापा शाम को हमारे नाना के घर जाने वाले थे और मैं घर पर बिल्कुल अकेली रहने वाली थी. तो मैंने शाम को थोड़ा मेकअप किया और नाईट सूट पहन लिया.. लेकिन मैंने सूट के अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी.. जिसकी वजह से मैं चलती थी तो हमारे बूब्स हिलते हुए साफ दिख रहे थे और मैं बहुत सेक्सी लग रही थी. फिर शाम को बहुत इंतजार करने के बाद विनोद हमारे घर आया और उस समय मम्मी, पापा घर पर नहीं थे.. क्योंकि वो जा चुके थे. तो मैंने दरवाजा खोला तो बाहर विनोद खड़ा था और मैंने उसे अंदर बुलाया.. विनोद ने पूछा कि क्या काम था? तो मैंने कहा कि तुम पहले बैठो फिर बताती हूँ. तो मैं जानबूझ कर उसके आगे पीछे चलने लगी और शायद उसकी नज़रें हमारे बूब्स और गांड पर जा रही थी और मैंने भी नोटीस किया कि उसका लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा है. तो मैंने सोचा कि आज तो पक्का यह मेरी प्यास बुझा देगा और मैं विनोद के साथ सोफे पर बैठ गई और मैंने विनोद से कहा कि मुझे थोड़े चक्कर आ रहे है और मेरी कमर दर्द कर रही है. तो विनोद ने कहा कि क्या यह काम था? फिर मैंने कहा कि नहीं यार.. हमारे कॉलेज में एक बहुत बड़ा प्रोग्राम है जिसके बारे में मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.. लेकिन मेरी कमर में बहुत दर्द की वजह से शायद बात करने में मज़ा नहीं आएगा. तो उसने कहा कि सुदीप्ति तुम दर्द की गोली ले लो शायद उससे तुम्हारा दर्द कम हो जाएगा. तो मैंने कहा कि तुम्हारे आने से पहले मैंने सब कुछ ले लिया है.. लेकिन फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा और मैंने कहा कि क्या तुम मेरी कमर पर बाम लगा दोगे? तो वो सोचने लगा और कहा कि ठीक है तुम बाम ले आओ. फिर मैं बाम लेने दूसरे कमरे में चली गई और जब वापस लौटी तो वो मुझे आते हुए घूर रहा था और उसकी नजरें हमारे झूलते बूब्स पर ही टिकी थी. फिर मैं बाम लेकर आई और आकर सीधी सोफे पर उल्टा लेट गई.. मैंने ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी यह बात शायद उसको पता नहीं थी और फिर उसने कहा कि सुदीप्ति चलो में तुम्हारे बाम लगाता हूँ.. बताओ तुम्हे कहाँ पर दर्द है.

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तो मैंने कहा कि ठीक है तुम मेरी पूरी कमर पर बाम लगा दो. फिर उसने कहा कि थोड़ा नाईटी को ऊपर करना होगा.. मैंने कहा कि तुम जितना चाहो कर दो मुझे कोई समस्या नहीं है.. तो उसने जैसे ही मेरी नाईटी को ऊपर किया मेरी गांड साफ साफ दिखने लगी.. तभी वो खड़ा हो गया और कहने लगा कि सुदीप्ति तुमने अंदर कुछ पहना ही नहीं. तो मैंने कहा कि विनोद प्लीज कुछ मत सोचो मेरी कमर में बहुत दर्द है तुम प्लीज़ मालिश कर दो. फिर विनोद भी शायद अब गरम हो रहा था तो उसने कहा कि ठीक है और वो सोफे पर बैठ गया और जैसे ही उसने मेरी कमर पर हाथ रखा हमारे मुहं से सीईईईई निकल गई. तो उसने कहा कि क्या हुआ सुदीप्ति? मैंने कहा कि कुछ नहीं.. लेकिन दोस्तों पहली बार कोई लड़का हमारे शरीर को छू रहा था.. वो क्या एहसास था. में तो पागल हुई जा रही थी. मेरी निप्पल बड़ी होने लगी थी.. मेरी चूत लंड के लिए अब और तड़पने लगी थी. हमारे पूरे शरीर में अजीब सा अहसास महसूस होने लगा था और वो धीरे धीरे हमारे शरीर पर अपना एक हाथ घुमाकर मुझे गरम कर रहा था और फिर मैंने चुपके से देखा तो वो दूसरे हाथ से अपने लंड को सहला रहा था क्योंकि मेरी गांड उसकी आँखो के सामने बिल्कुल नंगी थी.

वह दिन आज भी मुझे याद है. उसने धीरे धीरे अपना एक हाथ बड़ाकर मेरी गांड दबाना शुरू किया और मेरी चूत से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा. तभी में थोड़ा घूम गई और मैंने देखा कि विनोद की दोनों आँखे बंद थी.. वो भी अपनी आँखे बंद करके मज़ा ले रहा था. तभी अचानक से मैं बैठ गई और उसके होंठ पर किस करने लगी आआअहह क्या मजा आ रहा था और वो भी पागलों की तरह मुझे किस करने लगा और ज़ोर ज़ोर से मुझे दबाने लगा. तो मैंने अपनी नाईटी उतार दी और मैं अब उसके सामने पूरी नंगी थी.. वो तो मुझे घूरकर देखता ही रहा और उसने कहा कि सुदीप्ति आज तो तुमने मुझे जन्नत दिखा दि और हमारे बूब्स को दबाने लगा उउउफ्फ दर्द हो रहा था.. लेकिन वो ज़ोर ज़ोर से दबाता रहा और मैं एक हाथ उसके लंड पर घुमाने लगी. वो भी उउउँ आआहह करने लगा और कहने लगा कि सुदीप्ति तुम बहुत सेक्सी हो मेरी जान अह्ह्ह.. प्लीज आज हमारे लंड को चूसो उउउंम. तो मैंने उसका लंड बाहर निकाला तो मेरी आँखे खुली की खुली रह गई. उसका लंड बहुत मोटा था और बड़ा भी.. लेकिन मैंने कुछ नहीं सोचा और चूसने लगी उूउउंम ओह्ह्ह वाह उसका क्या लंड था? फिर विनोद ने हमारे सर को ज़ोर से पकड़ा और लंड को आगे पीछे करने लगा.. उसका लंड हमारे गले के आखरी कोने तक पहुंच रहा था.. लेकिन मुझे बहुत मज़ा भी आ रहा था और मैं पागलों की तरह बस मज़े ले रही थी और वो क्या एहसास था.. मैं बयां नहीं कर सकती. उसका लंड तो जैसे हमारे मुहं को ही चूत समझ बैठा था और करीब 5 मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा. फिर विनोद ने कहा कि सुदीप्ति लेट जाओ.. तो में लेट गई और वो हमारे बूब्स को चूसने लगा और हमारे पूरे शरीर पर हाथ घुमाने लगा और मैं बस अहह उउउंम अहह और करो विनोद उउउफ़फ्फ़ मेरी जान और फिर वो धीरे धीरे मेरी चूत की तरफ बढ़ा और कुत्ते की तरह मेरी लंड की प्यासी चूत को चाटने लगा. वाह मुझे क्या मजा आ रहा था और 10 से 15 मिनट तक वो हमारे शरीर और चूत को चाटता रहा. तो मैंने कहा कि विनोद प्लीज अब मुझे चोदो.. फिर विनोद ने कहा कि हाँ थोड़ा रुको अभी चोदता हूँ और तुम्हारा सारे बदन का दर्द अभी खत्म करता हूँ और वो हमारे दोनों पैरों के बीच में बैठ गया. मित्रों ये कहानी आप देशीअडल्टस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं.

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मित्रों, मैं आप लोगों को एक बात बता दूँ कि यह मैं पहली बार करवा रही थी.. क्योंकि उस वक़्त मैं वर्जिन थी. फिर विनोद ने अपना लंड मेरी नाज़ुक सी चूत पर रखा और रगड़ने लगा और अपने लंड से मेरी चूत के दाने को सहलाने लगा. अह्ह्ह मैं उछलने लगी और हमारे मुहं से गाली निकल गई कुत्ते हरामी जल्दी से चोद मुझे. तो विनोद ज़ोर से हंसने लगा और फिर उसने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के छेद पर रखा आआअहह और अंदर डालने की कोशिश करने लगा.. लेकिन लंड अंदर नहीं जा रहा था और मुझे बहुत दर्द हो रहा था. तो मैंने कहा कि विनोद लगता है आज मेरी चूत फट जाएगी प्लीज़ कुछ करो. तो उसने कहा कि कुछ नहीं होगा थोड़ा इंतजार करो.. उसने मेरी चूत में एक ऊँगली डाल दी और आगे पीछे करके मेरी चूत का थोड़ा रस निकाल लिया और उसके लंड से थोड़ा पानी निकला हुआ था तो उसने वो भी अपने लंड के टोपे पर लगा दिया.. जिससे उसका लंड बहुत गीला और चमकने लगा था और उसने फिर से मेरी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और एक ज़ोर का धक्का लगाते ही उसका टोपा मेरी चूत में घुस गया.

मैं चिल्लाने लगी ऊईई माँ मर गई.. बाहर निकाल दो प्लीज़ में मर जाऊंगी.. ऊऊओऊ प्लीज विनोद निकाल.. लेकिन उसने मेरी एक ना सुनी और दूसरा धक्का मारा और मेरी तो जान निकलने लगी.. लेकिन उसका लंड चूत के अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था और फिर उसने थोड़ा थूक अपने हाथ में लिया और लंड पर लगा दिया और मेरी चूत से जो पानी बाहर निकल रहा था.. उसने वो भी लंड पर लगा दिया और फिर से एक और धक्का मारा.. इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड मेरी चूत में घुस गया और मैं दर्द से रोने लगी और चिल्लाने लगी. तो उसने कहा कि रो मत अभी थोड़ी देर में तेरी चूत का दर्द कम हो जाएगा.. लेकिन मुझ पर क्या बीत रही थी बस में ही जानती थी.. उसने तो बस अपने लंड को आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे पूरा चूत में ठोकर में घुसा दिया.

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तो मेरी भोसड़े से खून निकलने लगा और मुझे अब चूत में थोड़ी थोड़ी जलन होने लगी थी.. शायद यह मेरी पहली चुदाई की वजह से था और में बस रोए जा रही थी.. लेकिन मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था आहह विनोद उुअंम्म उफफउहह चोदो मुझे आहह और ज़ोर से मुझे वो एहसास.. वाह क्या लग रहा था? और उसका लंड लगातार आगे पीछे हो रहा था और मैं जैसे स्वर्ग में पहुंच रही थी.. उस दर्द का मत पूछो हमारे रोंगटे खड़े हो गये थे और वो बस मुझे चोदे जा रहा था. बुर से झकड़.. झकड़.. झकड़.. झप.. झप… की आवाजें आ रही थी.  फिर करीब 17 मिनट बाद उसके धक्के और तेज हो गये.. मैं बस अआहह उफ्फ्फ कर रही थी और रोए जा रही थी. तभी थोड़ी देर में मुझे अंदर कुछ गरम गरम महसूस हुआ जैसे किसी ने मेरी चूत में लोहा पिघलाकर डाल दिया हो. तो उसने कहा कि सुदीप्ति मुझे माफ़ करना में कंट्रोल नहीं कर पाया और मेरा वीर्य तुम्हारी चूत में निकल गया.

मित्रगणों, उस वक़्त में भी दो बार वीर्य निचोड़ चुकी थी. फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला तो पूरा खून से लाल था और मुझे भी सूकून महसूस हुआ. तो उसने कहा कि क्यों सुदीप्ति तुम्हे इस चुदाई में मज़ा आया? फिर मैंने कहा कि विनोद ने मुझे आज दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी दी है. मैं जैसे ही खड़ी हुई तो मुझसे चला भी नहीं जा रहा था. तो विनोद ने कहा कि सुदीप्ति मम्मी, पापा के सामने थोड़ा ठीक से चलना और उन्हें इस बात का पता मत चलने देना. तो मैंने कहा कि मुझे मरना है.. जो मैं पता चलने दूंगी. फिर विनोद ने कहा कि मैं अब जाता हूँ.. लेकिन जब कभी भी तुम्हे इस तरह का दर्द हो मुझे जरुर याद करना और वो यह कहकर मुस्कुराता हुआ अपने घर चला गया. तभी उसके जाते ही मैंने अपनी दोस्त सुरेखा को फोन किया और उसको अपनी पूरी चुदाई की कहानी सुना दी .. उसने भी जोश में आकर लंड की प्यासी चूत एक 48 साल के अंकल से चुदाई करा डाली.

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