Drishyam, ek chudai ki kahani-31

अर्जुन भी आरती से बातें करते हुए काफी उत्तेजित हो गया था। अर्जुन के लण्ड में भी उसका वीर्य फुंफकार रहा था। अर्जुन ने आरती को चोदने की फुर्ती बढ़ाई।

जैसे जैसे अर्जुन आरती की चूत में अपने लण्ड से थपाक थपाक चोट मारने लगा वैसे वैसे आरती के मुंह से सिसकारियां और कराहटें निकलनी शुरू हो गयीं। अर्जुन के लण्ड का मूल आरती के चूतड़ों पर थपाक थपाक की आवाज से चपेट मारने लगे वैसे आरती और अर्जुन दोनों अपने चरम पर पहुंच गए।

अर्जुन ने अपने गरम वीर्य का फव्वारा आरती की चूत के अंदर छोड़ा तो आरती भी अर्जुन के वीर्य की गरमी महसूस कर अपने को रोक नहीं पायी और “आह….. ओह….. हाय…… अर्जुन…. ” कहती हुई अर्जुन को अपने बाहुपाश में सख्ती से बांधती हुई ढह पड़ी और शिथिल हो कर बिस्तरे पर आँखें बंद कर कुछ देर तक अपने यह चरमोन्माद का अनुभव करती रही।

पति पत्नी जब ढेर हो कर हाँफते हुए बिस्तर पर लुढ़क गए तब कुछ देर बाद अर्जुन ने आरती को पीछे से बाँहों में लेते हुए कहा, “आरती अब हम साथ में बैठ कर वेब साइट ब्राउज़ करेंगे।”

आरती ने शरारती नज़रों से पति की और देखते हुए कहा, “जरूर देखूंगी, और बातें भी करुँगी, पर तुम ऐसा कोई उल्टापुल्टा आईडिया मेरे पर आजमा ने की कोशिश मत करना।”

अर्जुन ने हँसते हुए आरती के स्तनोँ को जोरदार दबाते हुए कहा, “ठीक है बाबा। समझ गया। कोई उलटिपुलटि बात नहीं करूंगा बस?”

आरती, “ओय बाबा! बस भी करो, कितने जोर से दबाते हो। दर्द होता है।”

दूसरे दिन इतवार की छुट्टी थी। अर्जुन सुबह से ही लैपटॉप पर लगा हुआ था। आरती रसोई में काम कर रही थी। अर्जुन आरती के नाम से कुछ मर्दों से चैट कर रहा था। उसने कई प्रोफाइल्स देख रखीं थीं। उसमें से अर्जुन ने चार मर्दों को पसंद किया था। उन चारों मर्द हट्टेकट्टे थे, उनके स्नायु और मांसपेशियाँ और ख़ास बात यह थी की उनके लण्ड ऐसे थे की देखते ही अच्छी अच्छी लड़कों की चूत से पानी बहने लगे।

उन चारों मर्दों के लण्ड तगड़े होने के अलावा उनमें यह ख़ास क्षमता थी की वह काफी समय तक बिना झड़े चोद सकते थे और चुदाई करवाने वाली औरत को जबरदस्त सुख दे सकते थे। वैसे तो सब मर्द ऐसा दावा कर सकते हैं। पर उन चार मर्दों की बातों में अर्जुन को काफी वजन दिखा। मतलब अर्जुन को लगा की वह हवा में बातें नहीं कर रहे थे।

अर्जुन उन सब में एक रमेश नामक व्यक्ति से कुछ ज्यादा ही प्रभावित हुआ था। रमेश से प्रभावित होने के कई कारण थे। सबसे पहला कारण यह था की रमेश का लण्ड तो बाकी तीन मर्दों की तरह तगड़ा, लंबा और मोटा तो था ही पर पर उसके अलावा रमेश का लण्ड एकदम काला, चिकना और अँधेरे में भी चमकता दिख रहा था।

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जब अर्जुन ने इसका कारण पूछा तो रमेश ने बताया की जैसे ही सेक्स की बात होती है तो उसका काला लण्ड एकदम खड़ा सख्त हो जाता है और उसका पूर्व रस उसके लण्ड के छिद्र में से प्लावित होने लगता है और उसके लण्ड की पूरी गोलाई पर छा जाता है। अर्जुन के मन में जो बीबीसी (काला तगड़ा लण्ड) की जो कल्पना थी वह रमेश के लण्ड से हूबहू मिलती थी।

दुसरा कारण यह था की रमेश का स्वभाव एकदम सरल लगता था। रमेश ने अपने विवाहित जीवन के बारे में, अपने बच्चों के बारे में, अपनी नौकरी के बारे में, अपनी माली स्थिति के बारे में, अपनी चुदाई की क्षमता के बारे में कोई लागलपेट बगैर सारी बातें बिना कोई अभिमान या हीनता के सरल भाषा में अर्जुन को बता दी थीं। अर्जुन को लगा की शायद रमेश जो कह रहा था वह सच था। अर्जुन को लगा की वैसे रमेश कोई ऐसी बात नहीं करेगा जिससे उसके संबंधों में दरार पड़े, पर अगर ऐसा कुछ हो भी गया तो रमेश को वह अपनी और से बड़े अच्छे तरीके से सम्हाल सकता था।

सबसे बड़ी बात अर्जुन को यह लगी की रमेश अर्जुन को आरती समझ कर बार बार यही कहता रहता था की वह उसे बहुत प्यार करने लगा था। अर्जुन ने आरती की अलग अलग पोज़ में सीधी सादी तस्वीरें दिखाई थीं। उन तस्वीरों में कोई सेक्सी पोज़ या अश्लील तस्वीरें नहीं थीं।

अर्जुन ने रमेश से यह भी छिपाया था की आरती शादीशुदा थी। अर्जुन को वास्तव में लगा की रमेश आरती को सचमुच बहुत प्यार करने लगा था। रमेश बार बार अर्जुन को यही पूछता रहता की क्या वह रमेश से शादी करेगी? या क्या वह रमेश से प्यार करेगी?

रमेश एक बड़ा ही संवेदनशील और भावनाप्रधान व्यक्ति था। उसकी पत्नी कुछ सालों पहले किसी बीमारी में गुजर गयी थी। तबसे रमेश अकेला घर परिवार को सम्हाले हुए था। उसके दो बच्चे थे। उम्र में छोटे थे। रमेश की पत्नी बहुत स्नेहमयी थी। वह रमेश को बहुत प्यार करती थी और घर को बड़ी सुझबुझ से सम्हालती थी।

हालांकि रमेश एक संवेदनशील आदमी था, पर सम्भोग करने के समय वह अपनी पार्टनर को एक महाकाय साँड़ की तरह चोदता था। उसका लण्ड इतना भयंकर और प्रचण्ड था की पूरी चुदाई दरम्यान सख्त लोहे के छड़ के सामान खड़ा ही रहता था और पत्नी को चोद चोद कर हालत खराब कर देता था।

रमेश की पत्नी चुदवाते समय रमेश के चुदाई के धक्के के कारण हिल हिल कर पागल हो जाती थी। चुदाई के दरम्यान रमेश की पत्नी के दोनों स्तन इतने जोर से और इतनी ज्यादा देर तक हिलते रहते थे की कई बार तो रमेश की पत्नी को डर लगता था की कहीं वह उसकी छाती से अलग ही ना हो जाएँ।

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जब रमेश उसकी बीबी को चोदने लगता था तो थकता नहीं था। बेचारी बीबी चुदवाते चुदवाते त्राहिमाम त्राहिमाम हो जाती थी, पर रमेश था की पूरी रात लगा ही रहता था।

फिर भी उसकी बीबी ने कभी रमेश को यह मौक़ा नहीं दिया की जब रमेश का चुदाई के लिए मन करे तो वह मना करदे या कोई बहाना करे। चुदाई के बाद बेचारी पत्नी दो या तीन दिन तक लड़खड़ाती चलती तब तक तो दूसरी चुदाई का दिन आ जाता।

पत्नी के देहांत के बाद रमेश की जैसे दुनिया लूट गयी। ना तो घर में और ना तो बाहर चैन पड़ता था। शादी के कुछ दिनों के बाद अपनी कामुक भूख मिटाने के लिए कभी कभी रमेश वेश्याओं के पास जाता था। पर दो या तीन बार जाने के बाद सारी वेश्याओं ने रमेश से चुदवाने के रेट बहुत बढ़ा दिए। उन सबकी शिकायत थी की एक बार जब रमेश किसी वेश्या को चोदता था तो उस दिन वह किसी और ग्राहक से चुदवाने के लायक नहीं रहती थी। वह इतना सख्त चोदता था की वह बेचारी चल नहीं सकती थी।

रमेश जिस वेश्या के पास जाता था उसका नाम था अनारकली। बातों बातों में अनारकली ने एक दिन अपनी एक सहेली वेश्या को रमेश के गजब की चोदने की क्षमता के बारे में बताया। उसकी बात ना मानकर उस सहेली वेश्या ने रमेश को चुनौती दी और रमेश से चुदवाने के लिए तैयार हुई। उस रात रमेश ने अनारकली और दूसरी सहेली वेश्या को एक ही बिस्तर पर बारी बारी से रातभर चोद कर बुरा हाल कर दिया। कहते हैं दूसरी रात दोनों वेश्याएं किसी और ग्राहक से चुदवा नहीं पायीं।

अर्जुन रमेश से आरती बन कर चैट करते करते एक ऐसी स्थिति में पहुँच गया जब उसे लगा की वह रमेश के प्रश्नों के उत्तर दे नहीं पा रहा था। अब अर्जुन की दुविधाएं बढ़ने लगीं। क्यूंकि आखिर में वह अर्जुन था आरती नहीं। वह भला आरती के मन के भाव कैसे रमेश को बता सकता था? अर्जुन को लगा की रमेश ही उन सब मर्दों में एक है जिसे आरती से परिचय कराया जा सकता है। पर अर्जुन को हालंकि रमेश पर काफी भरोसा था फिर भी उसे शतप्रतिशत भरोसे के काबिल साबित होने के लिए कुछ और परीक्षण करना चाहता था।

अर्जुन के दिमाग इस सब के लिए एक बढ़िया आइडिया आया। उसने प्रीति के नाम से एक आईडी बना दी। अर्जुन ने फिर आरती को कहा, “नेट पर बड़े शातिर और धोखेबाज लोगों की भरमार होती है। सौ में से नब्बे लोग ऐसे ही मिलते हैं। हम उनपर आसानी से विश्वास नहीं कर सकते। इन्हें हमें बहुत बारीकी से परखना होगा…

मैंने प्रीति के नाम से एक आईडी बना दी है। मैंने तुम्हारे साथ चैट करने के लिए कई मर्दों में से एक रमेश नाम से मर्द है उसे चुना है। अब तक का मेरा रमेश के साथ बातचीत के आधार पर अनुभव है वह यह है की रमेश एक साधारण भला इंसान है। उसमें कपट नहीं है। मैं चाहता हूँ की तुम उससे प्रीति के नाम से चैट करो। वह सभ्य है, तुमसे अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा और उसका लण्ड भी तगड़ा है…

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मैं चाहता हूँ की तुम उससे चैट करो। मैंने उससे आरती के नाम से चैट की है। तुम उसके साथ प्रीति के नाम से चैट करना। हम देखंगे की वह तुमसे भी वही कह रहा है जो आरती से कह रहा है या उसकी बातों में कोई फर्क है। बाद में यदि हमें ठीक लगेगा तो हम फिर उसे अपना सही परिचय देंगे।”

आरती ने अपने पति की और देखा और बोली, “तुम कह रहे हो तो मैं चैट करुँगी। पर तुम मुझे पता नहीं कौनसे अँधेरे अनजान कुँए में धकेल रहे हो। मुझे नहीं पता इसका अंजाम क्या होगा। बेहतर है की हम इस चक्कर में ना पड़ें।”

अर्जुन ने अपनी पत्नी की पीठ थपथपाते हुए कहा, “तुम यह सब चिंता मुझ पर छोड़ दो। अब तुम निश्चिन्त हो कर रमेश से चैट करो। बस यह ध्यान रहे की तुम आरती नहीं प्रीति हो।”

आरती ने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारे कहने पर यह कर रही हूँ। बाद में मुझे दोष मत देना।”

अर्जुन ने कहा, “ठीक है। अगर कोई फायदा होता है तो वह तुम्हारा और नुक्सान होता है तो मैं उसके लिए जिम्मेवार हूँ। बस?”

आरती इतने साल अपने पति के सहवास में रहने से इतना तो जान गयी थी की हालांकि उसका पति कामुकता के मामले में कुछ विचित्र स्वभाव का जरूर था, पर आरती को बहुत प्यार करता था और आरती को अपने पति के प्रति पूरा विश्वास था की वह कभी उसे धोखा नहीं देंगे। आरती भी तो पति को सुख देना चाहती थी और साथ साथ उसे भी उत्तेजना थी की दूसरे लोग सेक्स के बारे में क्या सोचते थे और क्या करते थे। आरती समझ चुकी थी की कहीं ना कहीं वह सेक्स की नयी दुनिया में पहला कदम रखने जा रही थी।

आरती को अच्छा नहीं लगता था किसी और के नाम से चैट करना। आरती सीधी लड़की थी और उसे कोई धोखा बाजी से नफरत थी। अपने पति के काफी आग्रह करने से बड़ी मुश्किल स आरती ने अपना नाम छुपा कर प्रीती के नाम से चैट करना माना।

पढ़ते रहिये, कहानी आगे जारी रहेगी!

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